भारत की व्यापार नीति, बजट दृष्टिकोण एवं वैश्विक आर्थिक रणनीति पर प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण

1. पृष्ठभूमि और संदर्भ

  • प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 फरवरी 2026 को Press Trust of India को लिखित साक्षात्कार में भारत की हालिया व्यापार नीतियों पर विस्तार से विचार रखे।
  • यह वक्तव्य संसद के बजट सत्र के पहले चरण के बाद आया, जहां विपक्ष ने भारत के नए व्यापार समझौतों की शर्तों पर प्रश्न उठाए थे।

2. “स्थिति की मजबूती से” व्यापार समझौते

  • प्रधानमंत्री के अनुसार भारत ने हाल के वर्षों में European Union और United States सहित कई देशों/समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं।
  • ये समझौते भारत की आंतरिक आर्थिक मजबूती, राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत पूर्वानुमेयता के कारण संभव हो पाए।
  • उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के लंबे वार्ताकाल के बावजूद ठोस परिणाम नहीं निकल पाए थे।

3. टैरिफ से आगे की व्यापार सोच

  • प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि व्यापार प्रतिस्पर्धा केवल आयात-निर्यात शुल्क (टैरिफ) तक सीमित नहीं है।
  • इसके प्रमुख घटक हैं:
    • तरलता (Liquidity)
    • प्रमाणीकरण (Certification)
    • प्रौद्योगिकी अपनाना
    • वैश्विक मानकों का अनुपालन
  • भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने तथा वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

4. MSMEs को वैश्विक व्यापार का केंद्र

  • FTAs विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
  • लाभान्वित क्षेत्र:
    • वस्त्र
    • चमड़ा
    • प्रसंस्कृत खाद्य
    • इंजीनियरिंग वस्तुएं
    • रसायन
    • हस्तशिल्प
    • रत्न एवं आभूषण
  • भारत की व्यापार नीति अब MSMEs को वैश्विक एकीकरण के केंद्र में रखती है।
  • युवाओं को केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रखकर वैश्विक व्यापार में सक्रिय भागीदार बनाने की रणनीति।

5. निजी क्षेत्र की भूमिका

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल सक्षम वातावरण तैयार कर सकती है।
  • वास्तविक परिवर्तन के लिए निजी क्षेत्र को आगे आना होगा।
  • “Zero Defect, Zero Effect” की अवधारणा को युवाओं, स्टार्ट-अप्स और MSMEs ने सकारात्मक रूप से अपनाया है।
  • MSMEs को तकनीकी रूप से उन्नत, निर्यातोन्मुख और वैश्विक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनना होगा।

6. बजट 2026–27 : “We are ready” दृष्टिकोण

  • प्रधानमंत्री ने बजट को मजबूरी का नहीं बल्कि तैयारी और आत्मविश्वास का परिणाम बताया।
  • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में वृद्धि को विकसित राष्ट्र बनने की दीर्घकालिक सोच से जोड़ा।
  • बुनियादी ढांचे में सरकारी निवेश का लाभ उठाने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ने का आह्वान।
  • नीति दृष्टिकोण: क्रमिक सुधार से प्रणालीगत परिवर्तन की ओर।

7. अगले दशक की शीर्ष सुधार प्राथमिकताएं

  • निरंतर संरचनात्मक सुधार
  • नवाचार को गहराई देना
  • शासन का और अधिक सरलीकरण

8. रक्षा क्षेत्र पर विशेष जोर

  • रक्षा सुधारों के सकारात्मक परिणाम हालिया सैन्य अभियानों के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
  • रक्षा बजट को किसी एक घटना से जोड़ने के बजाय सतत राष्ट्रीय आवश्यकता बताया।
  • वर्ष 2026 के बजट में रक्षा के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन।
  • यह पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक तथा किसी भी मंत्रालय को मिला सबसे बड़ा हिस्सा।

9. AI और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर

  • नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री का वक्तव्य।
  • बजट में कर प्रोत्साहन (Tax Incentives) का उद्देश्य:
    • उन्नत डेटा अवसंरचना में निवेश बढ़ाना
    • लागत कम करना
    • भारत को वैश्विक डेटा हब के रूप में स्थापित करना
  • इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना।
  • भारत को वैश्विक डेटा के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने का दृष्टिकोण।

Source: The Hindu