विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) स्वर्ण उद्योग की एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार संस्था है। इसका मुख्यालय लंदन में स्थित है तथा भारत, चीन, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसके कार्यालय हैं। इसके सदस्य विश्व की प्रमुख स्वर्ण खनन कंपनियाँ हैं। वर्तमान में डेविड हारक्वेल इसके अध्यक्ष तथा डेविड टैट इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। परिषद का मुख्य उद्देश्य बाजार विकास के माध्यम से सोने की मांग को प्रोत्साहित करना और उसे बनाए रखना है।
स्थापना एवं पृष्ठभूमि
विश्व स्वर्ण परिषद की स्थापना वर्ष 1987 में हुई। यह दक्षिण अफ्रीकी कंपनी ‘इंटरगोल्ड’ के साथ विलय के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आई, जिससे इसे इंटरगोल्ड के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय भी विरासत में मिले। उस समय रंगभेद (Apartheid) नीति के विरोध में कई देशों ने दक्षिण अफ्रीकी क्रूगरैंड (Krugerrand) स्वर्ण सिक्कों के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा था, जिसके संदर्भ में यह विलय महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्य एवं गतिविधियाँ
परिषद स्वर्ण के पक्ष में शोध प्रकाशित करती है तथा स्वर्ण आधारित विभिन्न उत्पादों को बढ़ावा देती है। इनमें SPDR गोल्ड शेयर्स, भारत और चीन में स्वर्ण संचय योजनाएँ (Gold Accumulation Plans) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह अपनी कॉर्पोरेट गतिविधियों के प्रचार हेतु वृत्तचित्र एवं फिल्में भी निर्मित करती है।
विवाद
विश्व स्वर्ण परिषद को लेकर हाल के वर्षों में विवाद भी सामने आए हैं। अक्टूबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय संगठन Survival International द्वारा एक अभियान चलाया गया, जिसमें उद्योग संगठनों से यह मांग की गई कि असंपर्कित (Uncontacted) आदिवासी समुदायों की भूमि से प्राप्त संसाधनों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला से बाहर रखा जाए। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि यदि सरकारों और कंपनियों ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो विश्व की लगभग आधी असंपर्कित जनजातियाँ समाप्त हो सकती हैं।
ब्रिटिश पत्रिका प्राइवेट आई की एक रिपोर्ट के अनुसार, WGC ने यह आरोप लगाया कि इस अभियान के दौरान जनता की ओर से भेजे गए ई-मेल्स को परिषद ने साइबर हमले के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे यह मामला और अधिक विवादास्पद हो गया।
निष्कर्ष
इस प्रकार, विश्व स्वर्ण परिषद वैश्विक स्वर्ण बाजार में एक प्रभावशाली संस्था है, जो जहाँ एक ओर स्वर्ण की मांग और बाजार विकास को प्रोत्साहित करती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी अधिकारों और नैतिक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर आलोचना और विवादों का भी सामना कर रही है।