- सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खुदरा बिक्री की आसान उपलब्धता पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इसकी बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या इसे अत्यंत कड़े नियमों के तहत नियंत्रित किया जाना चाहिए।
- न्यायालय ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसिड हमले के पीड़ितों के लिए छह सप्ताह के भीतर उचित पुनर्वास उपाय तैयार करने का निर्देश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एसिड हमले के पीड़ितों के लिए एक मॉडल पुनर्वास योजना बनाने और राज्यों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन में आवश्यक सहायता देने पर विचार करने को कहा।
- न्यायालय ने कहा कि पुनर्वास योजनाओं में पीड़ितों को मुआवजा, चिकित्सा सहायता, पुनर्वास और उच्च शिक्षा तक निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 2013 में जारी किए गए दिशानिर्देश अब काफी हद तक अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
- अदालत ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि एसिड की खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए और यदि प्रतिबंध संभव नहीं है तो इसकी बिक्री के लिए अत्यंत सख्त नियामक व्यवस्था क्यों न बनाई जाए।
- जिन राज्यों ने एसिड की बिक्री से संबंधित आवश्यक नियम अभी तक नहीं बनाए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शीघ्र नियम बनाने का निर्देश दिया।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एसिड हमलों की संख्या, दर्ज चार्जशीटों तथा ट्रायल और अपील स्तर पर लंबित मामलों की जानकारी देने को कहा गया।
- यह मामला एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें एसिड की खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
- याचिका में उन पीड़ितों को भी कानूनी संरक्षण और लाभ देने की मांग की गई है जिन्हें जबरन एसिड पिलाया गया और जिनको बाहरी विकृति के बिना गंभीर आंतरिक चोटें हुईं।
- केंद्र सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बदलाव कर जबरन एसिड पिलाए जाने से आंतरिक चोट झेलने वाले पीड़ितों को भी कानून के लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
- मामले में पेश किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के 2013 के दिशानिर्देशों के बावजूद बाजार में एसिड अभी भी आसानी से खरीदा जा सकता है।
- याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एसिड का उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए आवश्यक हो सकता है, लेकिन खुदरा और घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध वैकल्पिक उत्पादों के कारण इसकी खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने एसिड बिक्री के लिए संभावित कड़े उपायों पर चर्चा की, जिनमें खरीददार द्वारा खरीद का उद्देश्य बताना और खरीदारों का रिकॉर्ड रखना शामिल है।
- अदालत ने बाजार में आने और बिकने वाले एसिड की मात्रा पर नजर रखने के लिए एक स्वचालित और रियल-टाइम ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल दिशानिर्देश बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी भी आवश्यक है।
- केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसने पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मॉडल नियम और परामर्श जारी किए थे, लेकिन कई राज्यों ने आवश्यक समितियों का गठन या नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया।
- केंद्र की ओर से कहा गया कि लगभग 20 राज्यों में एसिड बिक्री से संबंधित नियमों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है।
- शाहीन मलिक ने अदालत के समक्ष एसिड की खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की जोरदार मांग करते हुए कहा कि 2013 के दिशानिर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है।
- मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले में दो प्रमुख चिंताओं को रेखांकित किया—पहली, एसिड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध या अत्यंत कठोर नियमन; और दूसरी, एसिड हमले के बाद तत्काल उपचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसिड हमले के बाद तत्काल उपचार, प्राथमिक चिकित्सा और बचाव संबंधी जानकारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी अत्यंत आवश्यक है।
- अदालत ने NGOs को स्कूलों और कॉलेजों के लिए एसिड हमलों की रोकथाम, आपातकालीन प्रोटोकॉल और हमले के बाद उपचार संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों के सुझाव देने को कहा।
- NGOs को इन विषयों पर अपने सुझाव चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की लगातार निगरानी करेगा और एसिड हमले के पीड़ितों की सुरक्षा, उपचार तथा पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
Source: The Print/IE
