वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई। विशेषज्ञों ने इस वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन (Resilience) का संकेत बताया। GDP वृद्धि को मुख्य रूप से मजबूत उपभोग, निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) से समर्थन मिला।
PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के CEO एवं महासचिव रणजीत मेहता ने Q1 की वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि व्यापक आधार (Broad-based Growth) पर आधारित रही, यानी केवल किसी एक क्षेत्र के कारण नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के योगदान से वृद्धि हुई।
पहली तिमाही में सकल पूंजी निर्माण (Gross Capital Formation) में 11.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश में मजबूती का संकेत है। GDP वृद्धि का 7.8% आंकड़ा कई अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों के अनुमानों से अधिक रहा।
CareEdge Ratings ने निवेश में तेज वृद्धि और सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय में तेजी को आर्थिक वृद्धि का प्रमुख कारण बताया। CareEdge Ratings के अनुसार, सरकार ने पहली तिमाही में ही अपने पूंजीगत खर्च को अग्रिम रूप से बढ़ाया (Front-loading of Capital Expenditure)।
CareEdge Ratings ने पहली तिमाही में GDP वृद्धि लगभग 7.3% रहने का अनुमान लगाया था, जबकि वास्तविक वृद्धि इससे अधिक 7.8% रही। उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों (High-Frequency Indicators) ने पहले ही अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत दिए थे।
आयकर में तर्कसंगत सुधार (Income Tax Rationalisation) ने घरेलू उपभोग को बढ़ावा देने में सहायता की। GST में तर्कसंगत सुधार (GST Rationalisation) ने भी उपभोग और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया।
पिछले एक वर्ष के दौरान अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति ने घरेलू खपत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत व्यय पर विशेष जोर दिए जाने से निवेश वृद्धि को गति मिली।
विनिर्माण क्षेत्र में लगातार मजबूती के संकेत दिखाई दिए। ऑटोमोबाइल बिक्री, कोर सेक्टर की वृद्धि और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे संकेतकों ने आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाई। GDP आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन व्यापक आर्थिक सुधार को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की 7.8% GDP वृद्धि किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है, बल्कि खपत, निवेश, विनिर्माण और सरकारी पूंजीगत खर्च सहित अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों के संयुक्त योगदान का परिणाम है।