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मोहाली में ‘ग्रीन फोर्ज’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन: GM फसल अनुसंधान में नई पहल

  • केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मोहाली स्थित राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव-विनिर्माण संस्थान (BRIC-NABI) में देश के अपनी तरह के पहले ‘ग्रीन फोर्ज’ (Green Forge) कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया।
  • केंद्रीय मंत्री ने ‘ग्रीन फोर्ज’ को आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified-GM) फसलों की क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
  • इस सुविधा का उद्घाटन BioE3—Biotechnology for Economy, Environment and Employment विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया गया।
  • ‘ग्रीन फोर्ज’ में नियंत्रित सिमुलेशन चैंबर स्थापित किए गए हैं, जिनमें विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों को कृत्रिम रूप से तैयार किया जा सकता है।
  • इन सिमुलेशन चैंबरों में प्रकाश की मात्रा और गुणवत्ता, आर्द्रता तथा तापमान को नियंत्रित और परिवर्तित किया जा सकता है।
  • यह सुविधा वैज्ञानिकों को GM फसलों को विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय परिस्थितियों में उगाने और उन पर प्रयोग करने में सहायता करेगी।
  • ‘ग्रीन फोर्ज’ के माध्यम से शोधकर्ता यह अध्ययन कर सकेंगे कि कोई विशेष GM फसल अलग-अलग जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करती है।
  • इससे यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि किसी नई GM फसल किस भौगोलिक क्षेत्र या स्थान पर खेती के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हो सकती है।
  • किसी नई GM फसल किस्म के विकसित होने के बाद उसके लिए उपयुक्त खेती क्षेत्र का निर्धारण एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है, जिसे ‘ग्रीन फोर्ज’ की नियंत्रित परिस्थितियों में किए गए प्रयोगों से आसान बनाया जा सकता है।
ग्रीन फोर्ज की प्रमुख विशेषताएं
  • नियंत्रित अनुकरण: इसमें प्रकाश की मात्रा और गुणवत्ता, आर्द्रता और तापमान को बदलने के लिए विशेष कक्षों की सुविधा है।
  • आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का परीक्षण: यह शोधकर्ताओं को कृत्रिम पर्यावरणीय मापदंडों के तहत आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का परीक्षण करने की अनुमति देता है।
  • स्थान की उपयुक्तता: यह क्षेत्र में नई आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधों की किस्मों को लगाने से पहले, उन सटीक क्षेत्रीय जलवायु का निर्धारण करने में मदद करता है जहां वे सबसे अच्छी तरह पनपती हैं।
  • एआई एकीकरण: कृषि अनुसंधान को सुव्यवस्थित करने के लिए आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों को उन्नत जैविक परिवेश के साथ जोड़ता है।
  • बायोई3 नीति: भारत की बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसे लॉन्च किया गया।
  • जैव अर्थव्यवस्था में उछाल: पिछले दशक में भारत की राष्ट्रीय जैव अर्थव्यवस्था में हुए महत्वपूर्ण विस्तार पर प्रकाश डाला गया।