- अमेरिका की प्रसिद्ध Javelin Anti-Tank Missile System का भारत में सह-उत्पादन किया जाएगा।
- इस संबंध में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) तथा अमेरिकी रक्षा कंपनियों Raytheon और Lockheed Martin के बीच समझौता हुआ है।
- यह साझेदारी भारत की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देगी।
- भारत में मिसाइल की अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
जैवलिन जॉइंट वेंचर क्या है?
Raytheon और Lockheed Martin मिलकर Javelin Joint Venture (JJV) के रूप में कार्य करती हैं।
JJV अब तक 55,000 से अधिक जैवलिन मिसाइलें, 12,000 से अधिक पुन: उपयोग योग्य लॉन्च यूनिट बना चुकी है।
अब JJV भारत में TASL के साथ मिलकर उत्पादन क्षमता विकसित करने पर काम करेगी।
भारत में क्या बनाया जाएगा?
समझौते के तहत भारत में मुख्य रूप से जैवलिन मिसाइल की Final Assembly, Integration Facility और विभिन्न घटकों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी।
हालांकि प्रारंभिक चरण में Sub-assembly kits और GEUs (Guidance Electronic Units) अमेरिका में निर्मित किए जाएंगे और बाद में भारत भेजकर उनकी असेंबली एवं इंटीग्रेशन किया जाएगा।
Guidance Electronic Unit (GEU)
- GEU मिसाइल का महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर आधारित मार्गदर्शन तंत्र है।
- यह मिसाइल को लॉन्च होने के बाद लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता करता है।
- लक्ष्य लॉक होने के बाद मिसाइल स्वयं लक्ष्य को ट्रैक करती है।
- इसी तकनीक के कारण जैवलिन को Fire-and-Forget Missile कहा जाता है।
भारत के लिए इस समझौते का महत्व
इस साझेदारी से भारत को:
- उन्नत रक्षा विनिर्माण तकनीक प्राप्त होगी।
- उच्च तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- भारतीय रक्षा उद्योग को विशेषज्ञता और तकनीकी ज्ञान मिलेगा।
- रक्षा आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी।
- विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।
आत्मनिर्भर भारत को मजबूती
- यह परियोजना भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों के अनुरूप है।
- इससे स्थानीय विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी।
- भारतीय कंपनियों की वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ेगी।
- उन्नत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भारत की क्षमता मजबूत होगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्व
- भारत में जैवलिन के स्थानीय उत्पादन से भारत और उसके सहयोगी देशों को हथियार प्रणाली की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा।
- व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को बल मिलेगा।
- क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा तैयारियों में सुधार होगा।
भारतीय सेना को क्या लाभ होगा?
स्थानीय असेंबली और उत्पादन से
- जैवलिन मिसाइल की समय पर उपलब्धता बढ़ेगी।
- भारतीय सेना की Operational Readiness मजबूत होगी।
- आवश्यकतानुसार मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति अधिक विश्वसनीय हो सकती है।
- उन्नत एंटी-टैंक क्षमता तक तेजी से पहुंच संभव होगी।
Interoperability का महत्व
स्थानीय उत्पादन का एक महत्वपूर्ण लाभ Interoperability भी है।
इसका अर्थ है कि भारतीय सेना, अमेरिकी सेना, अन्य सहयोगी देशों की सेनाएं समान हथियार प्रणालियों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग कर सकती हैं।
यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभियानों और रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण है।
जैवलिन मिसाइल क्या है?
Javelin Anti-Tank Guided Missile
- अमेरिकी सेना में पहली बार 1996 में शामिल की गई।
- यह एक Man-Portable Anti-Tank Guided Missile है।
- इसे एक सैनिक अपने कंधे से दाग सकता है।
- यह मुख्य रूप से टैंकों, बख्तरबंद वाहनों किलेबंद ठिकानों जैसे लक्ष्यों के विरुद्ध उपयोग की जाती है।
जैवलिन की प्रमुख विशेषताएं
- Shoulder-Launched
- Fire-and-Forget Technology
- Infrared Guidance System
- प्रभावी रेंज लगभग 2.5 किमी
- एक सैनिक द्वारा संचालित की जा सकती है।
- वजन लगभग 22 किलोग्राम
- मिसाइल का वजन लगभग 8.4 किलोग्राम
‘Fire-and-Forget’ तकनीक
जैवलिन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी Fire-and-Forget क्षमता है।
- सैनिक लॉन्चर के माध्यम से लक्ष्य को देखता है।
- लक्ष्य पर कर्सर लगाकर उसे लॉक किया जाता है।
- लक्ष्य की जानकारी मिसाइल के Guidance System को भेजी जाती है।
- मिसाइल दागने के बाद स्वयं लक्ष्य को ट्रैक करती है।
- सैनिक तुरंत सुरक्षित स्थान पर जा सकता है।
जैवलिन कैसे काम करती है?
- सैनिक Infrared Sight से लक्ष्य की पहचान करता है।
- लक्ष्य को लॉक किया जाता है।
- मिसाइल के अंदर मौजूद Guidance Computer लक्ष्य की जानकारी प्राप्त करता है।
- मिसाइल लॉन्च होने के बाद अपने Infrared Guidance System से लक्ष्य को ट्रैक करती है।
- ऑपरेटर को मिसाइल को लगातार नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती।
Soft Launch Mechanism
जैवलिन में एक विशेष तकनीक होती है जिसे Soft Launch Mechanism कहा जाता है।
- ट्रिगर दबाने पर शुरुआती मोटर मिसाइल को ट्यूब से बाहर निकालती है।
- इसके बाद मुख्य मोटर सक्रिय होती है।
- यह प्रणाली ऑपरेटर के लिए लॉन्च प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।
जैवलिन के दो फायरिंग मोड
1. Direct Attack Mode
- मिसाइल सीधे लक्ष्य की ओर उड़ती है।
- उपयोग – बंकर, किलेबंद ठिकाने, हेलीकॉप्टर जैसे लक्ष्यों के विरुद्ध
2. Top Attack Mode
- मिसाइल ऊपर की ओर उड़ती है।
- लगभग 150 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकती है।
- इसके बाद लक्ष्य पर ऊपर से तीव्र कोण से हमला करती है।
Top Attack Mode क्यों प्रभावी है?
टैंकों का ऊपरी हिस्सा सामान्यतः अपेक्षाकृत कम सुरक्षित कमजोर बख्तरबंद हो सकता है।
जैवलिन की Top Attack क्षमता मिसाइल को टैंक के सबसे कमजोर हिस्से पर ऊपर से हमला करने में सक्षम बनाती है।
यही इसकी एंटी-टैंक क्षमता को अत्यंत प्रभावी बनाता है।
Battle-Tested Weapon System
- इराक युद्ध, अफगानिस्तान युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध में यह मिसाइल वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा चुकी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में भूमिका
- 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के दौरान यूक्रेनी सेना ने जैवलिन मिसाइलों का व्यापक उपयोग किया।
- इसका इस्तेमाल रूसी Main Battle Tanks, Armoured Vehicles के विरुद्ध किया गया।
- जैवलिन यूक्रेनी प्रतिरोध का एक प्रमुख प्रतीक बन गई।
‘St. Javelin’ का प्रतीक
यूक्रेन युद्ध के दौरान:
- Mary Magdalene को FGM-148 Javelin मिसाइल पकड़े हुए दर्शाने वाली एक छवि लोकप्रिय हुई।
- इसे “St. Javelin” नाम दिया गया।
- यह यूक्रेनी प्रतिरोध और संघर्ष का एक प्रसिद्ध प्रतीक बन गई।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग
भारत में जैवलिन उत्पादन की पहल दर्शाती है कि:
- भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
- दोनों देश उन्नत रक्षा तकनीकों में साझेदारी बढ़ा रहे हैं।
- भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिल रही है।
निष्कर्ष
भारत में जैवलिन मिसाइल की असेंबली और उत्पादन क्षमता विकसित करना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।
इससे भारत को उन्नत रक्षा तकनीक, उच्च तकनीकी रोजगार, मजबूत रक्षा विनिर्माण क्षमता, बेहतर सैन्य तैयारी, अधिक विश्वसनीय हथियार आपूर्ति जैसे लाभ मिल सकते हैं।
यह पहल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता तथा भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेगी।
Source: Indian Express
