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CTET की संरचना एवं विषय-वस्तु

CTET परीक्षा का प्रारूप

  • CTET में सभी प्रश्न बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) होंगे।
  • प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प होंगे, जिनमें से एक सबसे उपयुक्त उत्तर होगा।
  • प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा।
  • परीक्षा में कोई नकारात्मक अंकन (Negative Marking) नहीं होगा।
  • CTET में दो पेपर होंगे:
    1. पेपर-I — कक्षा 1 से 5 के शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए।
    2. पेपर-II — कक्षा 6 से 8 के शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए।
  • जो अभ्यर्थी कक्षा 1 से 5 तथा 6 से 8 दोनों स्तरों के शिक्षक बनना चाहते हैं, उन्हें पेपर-I और पेपर-II दोनों देने होंगे।

पेपर-I — कक्षा 1 से 5

परीक्षा अवधि: 2 घंटे 30 मिनट।

विषय प्रश्न अंक
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र 30 MCQs 30
गणित 30 MCQs 30
पर्यावरण अध्ययन 30 MCQs 30
भाषा-I 30 MCQs 30
भाषा-II 30 MCQs 30
कुल 150 MCQs 150 अंक

 

प्रश्नों का स्तर एवं प्रकृति

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र:
प्रश्न 6–11 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की शिक्षा एवं सीखने से संबंधित शैक्षिक मनोविज्ञान पर आधारित होंगे। इसमें विविध प्रकार के शिक्षार्थियों की विशेषताओं एवं आवश्यकताओं, शिक्षार्थियों के साथ अंतःक्रिया तथा एक अच्छे सीखने के सहायक की विशेषताओं पर ध्यान दिया जाएगा।

भाषा-I:
प्रश्न शिक्षण के माध्यम से संबंधित भाषा दक्षता पर केंद्रित होंगे।

भाषा-II:
प्रश्न भाषा के तत्वों, संचार तथा बोधगम्यता (Comprehension) की क्षमता पर केंद्रित होंगे। भाषा-II, भाषा-I से अलग भाषा होगी।

गणित एवं पर्यावरण अध्ययन:
प्रश्न विषय की अवधारणाओं, समस्या-समाधान क्षमता तथा शिक्षाशास्त्रीय समझ एवं अनुप्रयोग पर आधारित होंगे। प्रश्न NCERT द्वारा कक्षा 1–5 के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के विभिन्न भागों से समान रूप से लिए जाएंगे।

पेपर-I का कठिनाई स्तर:
प्रश्न कक्षा 1–5 के NCERT पाठ्यक्रम के विषयों पर आधारित होंगे, लेकिन उनकी कठिनाई का स्तर एवं आपसी संबंध माध्यमिक स्तर तक हो सकता है।

CTET में उपलब्ध भाषाएँ

अभ्यर्थी CTET के लिए दो भाषाओं का चयन कर सकते हैं।

भाषा कोड भाषा कोड
अंग्रेजी 01 गुजराती 06
हिंदी 02 कन्नड़ 07
असमिया 03 खासी 08
बंगाली 04 मलयालम 09
गारो 05 मणिपुरी 10
मराठी 11 मिजो 12
नेपाली 13 उड़िया 14
पंजाबी 15 संस्कृत 16
तमिल 17 तेलुगु 18
तिब्बती 19 उर्दू 20

 

पेपर-II, भाषा एवं क्वालिफाइंग मार्क्स

पेपर-II — कक्षा 6 से 8

परीक्षा अवधि: 2 घंटे 30 मिनट।

विषय प्रश्न अंक
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र 30 MCQs 30
गणित एवं विज्ञान या सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान 60 MCQs 60
भाषा-I 30 MCQs 30
भाषा-II 30 MCQs 30
कुल 150 MCQs 150 अंक

गणित एवं विज्ञान का विकल्प गणित एवं विज्ञान शिक्षक के लिए तथा सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान का विकल्प सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए है। अन्य शिक्षक के लिए भाषा-I या भाषा-II में से संबंधित विकल्प लागू होगा।

पेपर-II के प्रश्नों की प्रकृति

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र:
प्रश्न 11–14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की शिक्षा एवं सीखने से संबंधित शैक्षिक मनोविज्ञान पर आधारित होंगे। इसमें विविध शिक्षार्थियों की विशेषताओं, आवश्यकताओं और मनोविज्ञान, शिक्षार्थियों के साथ अंतःक्रिया तथा अच्छे सीखने के सहायक की विशेषताओं पर ध्यान दिया जाएगा।

भाषा-I:
प्रश्न शिक्षण के माध्यम से संबंधित भाषा दक्षताओं पर केंद्रित होंगे।

भाषा-II:
प्रश्न भाषा के तत्वों, संचार और बोधगम्यता की क्षमताओं पर केंद्रित होंगे। भाषा-II, भाषा-I से अलग भाषा होगी।

गणित एवं विज्ञान तथा सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान:
इन विषयों के प्रश्न अवधारणाओं, समस्या-समाधान क्षमता, शिक्षाशास्त्रीय समझ और विषयों के अनुप्रयोग पर आधारित होंगे।

गणित एवं विज्ञान में 30-30 अंक के प्रश्न होंगे और प्रश्न कक्षा 6–8 के लिए NCERT द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के विभिन्न भागों में समान रूप से वितरित होंगे।

पेपर-II का कठिनाई स्तर

पेपर-II के प्रश्न कक्षा 6–8 के NCERT पाठ्यक्रम में निर्धारित विषयों पर आधारित होंगे, लेकिन प्रश्नों का कठिनाई स्तर एवं आपसी संबंध सीनियर सेकेंडरी स्तर तक हो सकता है।

प्रश्नपत्र की भाषा

मुख्य प्रश्नपत्र द्विभाषी (हिंदी/अंग्रेजी) होगा।

CTET में उत्तीर्ण होने के लिए अंक

NCTE की अधिसूचना के अनुसार, जो व्यक्ति TET परीक्षा में 60% या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, उसे TET उत्तीर्ण माना जाएगा।

विद्यालय प्रबंधन अपनी लागू आरक्षण नीति के अनुसार SC/ST, OBC, दिव्यांग आदि वर्गों के अभ्यर्थियों को रियायत देने पर विचार कर सकते हैं।

CTET Paper-I और Paper-II के विस्तृत पाठ्यक्रम

पेपर-I का पाठ्यक्रम

पेपर-I — कक्षा 1 से 5

I. बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र — 30 प्रश्न

A. बाल विकास — 15 प्रश्न

इस भाग में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:

  • विकास की अवधारणा और उसका सीखने के साथ संबंध।
  • बच्चों के विकास के सिद्धांत।
  • आनुवंशिकता और पर्यावरण का प्रभाव।
  • समाजीकरण की प्रक्रिया — सामाजिक दुनिया तथा बच्चे, शिक्षक, माता-पिता और सहपाठी।
  • पियाजे, कोहलबर्ग और वाइगोत्स्की के सिद्धांत एवं उनके आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • बाल-केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणाएँ।
  • बुद्धि की अवधारणा का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • बहुआयामी बुद्धि।
  • भाषा एवं चिंतन।
  • सामाजिक संरचना के रूप में लिंग; लैंगिक भूमिकाएँ, लैंगिक पक्षपात और शैक्षिक व्यवहार।
  • शिक्षार्थियों में व्यक्तिगत अंतर तथा भाषा, जाति, लिंग, समुदाय, धर्म आदि की विविधता के आधार पर अंतर को समझना।
  • सीखने के लिए आकलन और सीखने के आकलन के बीच अंतर।
  • विद्यालय आधारित आकलन तथा सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) की अवधारणा और व्यवहार।
  • शिक्षार्थियों की तैयारी के स्तर का आकलन करने, कक्षा में सीखने एवं आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ाने तथा शिक्षार्थी की उपलब्धि का आकलन करने के लिए उपयुक्त प्रश्न तैयार करना।

B. समावेशी शिक्षा एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समझ — 5 प्रश्न

  • वंचित एवं पिछड़े वर्गों सहित विभिन्न पृष्ठभूमि वाले शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को संबोधित करना।
  • सीखने में कठिनाई तथा अन्य प्रकार की अक्षमता वाले बच्चों की आवश्यकताओं को समझना।
  • प्रतिभाशाली, रचनात्मक और विशेष रूप से सक्षम शिक्षार्थियों को संबोधित करना।

C. अधिगम एवं शिक्षाशास्त्र — 10 प्रश्न

  • बच्चे किस प्रकार सोचते और सीखते हैं तथा वे विद्यालयी प्रदर्शन में सफल क्यों नहीं हो पाते।
  • शिक्षण एवं अधिगम की मूल प्रक्रियाएँ।
  • बच्चों की सीखने की रणनीतियाँ।
  • सीखने को सामाजिक गतिविधि तथा सीखने के सामाजिक संदर्भ के रूप में समझना।
  • बच्चे को समस्या-समाधानकर्ता एवं वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में समझना।
  • बच्चों में सीखने की वैकल्पिक अवधारणाएँ तथा उनकी गलतियों को सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण समझना।
  • संज्ञान एवं भावनाएँ।
  • प्रेरणा एवं अधिगम।
  • सीखने को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत एवं पर्यावरणीय कारक।

II. गणित — 30 प्रश्न

A. विषय-वस्तु — 15 प्रश्न

  • ज्यामिति।
  • आकृतियाँ एवं स्थानिक समझ।
  • हमारे आसपास के ठोस पदार्थ।
  • संख्याएँ।
  • जोड़ एवं घटाव।
  • गुणा।
  • भाग।
  • मापन।
  • भार।
  • समय।
  • आयतन।
  • आँकड़ों का प्रबंधन।
  • पैटर्न।
  • धन/मुद्रा।

 गणित, EVS और भाषा-I

गणित — शिक्षाशास्त्रीय मुद्दे — 15 प्रश्न

  • गणित की प्रकृति एवं तार्किक चिंतन।
  • बच्चों के चिंतन एवं तर्क के पैटर्न तथा अर्थ निर्माण एवं सीखने की रणनीतियों को समझना।
  • पाठ्यक्रम में गणित का स्थान।
  • गणित की भाषा।
  • सामुदायिक गणित।
  • औपचारिक एवं अनौपचारिक विधियों से मूल्यांकन।
  • शिक्षण की समस्याएँ।
  • त्रुटि विश्लेषण तथा सीखने एवं शिक्षण से संबंधित पहलू।
  • निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण।

III. पर्यावरण अध्ययन — 30 प्रश्न

A. विषय-वस्तु — 15 प्रश्न

परिवार एवं मित्र:

  • संबंध।
  • कार्य एवं खेल।
  • पशु।
  • पौधे।

अन्य विषय:

  • भोजन।
  • आवास।
  • जल।
  • यात्रा।
  • हम क्या बनाते और करते हैं।

B. शिक्षाशास्त्रीय मुद्दे — 15 प्रश्न

  • EVS की अवधारणा एवं क्षेत्र।
  • EVS का महत्व एवं एकीकृत EVS।
  • पर्यावरण अध्ययन एवं पर्यावरण शिक्षा।
  • अधिगम के सिद्धांत।
  • विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के साथ EVS का क्षेत्र एवं संबंध।
  • अवधारणाओं को प्रस्तुत करने के तरीके।
  • गतिविधियाँ।
  • प्रयोगात्मक/व्यावहारिक कार्य।
  • चर्चा।
  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)।
  • शिक्षण सामग्री/सहायक सामग्री।
  • समस्याएँ।

IV. भाषा-I — 30 प्रश्न

A. भाषा बोध — 15 प्रश्न

दो अपठित गद्यांश/पाठ दिए जाएंगे—एक गद्य या नाटक तथा एक कविता। इन पर बोध, निष्कर्ष, व्याकरण एवं मौखिक क्षमता से संबंधित प्रश्न होंगे।

गद्यांश साहित्यिक, वैज्ञानिक, कथात्मक या विवेचनात्मक हो सकता है।

B. भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र — 15 प्रश्न

  • भाषा का अधिगम एवं अर्जन।
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
  • सुनने एवं बोलने की भूमिका।
  • भाषा का कार्य तथा बच्चों द्वारा भाषा का उपकरण के रूप में प्रयोग।
  • विचारों को मौखिक एवं लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।

भाषा-I एवं भाषा-II

भाषा-I — भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र

  • विविध कक्षा में भाषा शिक्षण की चुनौतियाँ।
  • भाषा संबंधी कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ एवं विकार।
  • भाषा कौशल।
  • भाषा बोध एवं दक्षता का मूल्यांकन — बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
  • शिक्षण-अधिगम सामग्री — पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री तथा कक्षा के बहुभाषी संसाधन।
  • उपचारात्मक शिक्षण।

V. भाषा-II — 30 प्रश्न

A. बोध — 15 प्रश्न

दो अपठित गद्यांश होंगे। ये विवेचनात्मक, साहित्यिक, कथात्मक या वैज्ञानिक हो सकते हैं। इन पर बोध, व्याकरण एवं मौखिक क्षमता से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।

B. भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र — 15 प्रश्न

  • भाषा का अधिगम एवं अर्जन।
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
  • सुनने एवं बोलने की भूमिका।
  • भाषा का कार्य एवं बच्चों द्वारा भाषा का उपकरण के रूप में प्रयोग।
  • भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • विविध कक्षा में भाषा शिक्षण की चुनौतियाँ।
  • भाषा संबंधी कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ एवं विकार।
  • भाषा कौशल।
  • बोलने, सुनने, पढ़ने और लिखने के माध्यम से भाषा बोध एवं दक्षता का मूल्यांकन।
  • शिक्षण-अधिगम सामग्री — पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री एवं बहुभाषी कक्षा संसाधन।
  • उपचारात्मक शिक्षण।

पेपर-II का पाठ्यक्रम

पेपर-II — कक्षा 6 से 8

I. बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र — 30 प्रश्न

A. बाल विकास — 15 प्रश्न

  • विकास की अवधारणा एवं सीखने के साथ उसका संबंध।
  • बच्चों के विकास के सिद्धांत।
  • आनुवंशिकता एवं पर्यावरण का प्रभाव।
  • समाजीकरण की प्रक्रिया — शिक्षक, माता-पिता और सहपाठी।
  • पियाजे, कोहलबर्ग एवं वाइगोत्स्की के सिद्धांत तथा आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • बाल-केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा।
  • बुद्धि की अवधारणा का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • बहुआयामी बुद्धि।
  • भाषा एवं चिंतन।
  • लिंग एक सामाजिक संरचना के रूप में।
  • लैंगिक भूमिकाएँ, लैंगिक पक्षपात एवं शैक्षिक व्यवहार।
  • शिक्षार्थियों में व्यक्तिगत अंतर तथा भाषा, जाति, लिंग, समुदाय, धर्म आदि की विविधता।
  • सीखने के लिए आकलन एवं सीखने के आकलन के बीच अंतर।
  • विद्यालय आधारित आकलन तथा सतत एवं व्यापक मूल्यांकन।
  • शिक्षार्थियों की तैयारी, सीखने, आलोचनात्मक चिंतन एवं उपलब्धि के आकलन हेतु उपयुक्त प्रश्नों का निर्माण।

B. समावेशी शिक्षा एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे — 5 प्रश्न

  • विभिन्न पृष्ठभूमि वाले, वंचित एवं पिछड़े शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को संबोधित करना।
  • सीखने में कठिनाई या अक्षमता वाले बच्चों की आवश्यकताओं को समझना।
  • प्रतिभाशाली, रचनात्मक एवं विशेष रूप से सक्षम शिक्षार्थियों को संबोधित करना।

C. अधिगम एवं शिक्षाशास्त्र — 10 प्रश्न

  • बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं।
  • बच्चे विद्यालय में सफलता प्राप्त करने में क्यों असफल होते हैं।
  • शिक्षण-अधिगम की मूल प्रक्रियाएँ।
  • बच्चों की सीखने की रणनीतियाँ।
  • सीखना एक सामाजिक गतिविधि तथा सामाजिक संदर्भ में सीखना।
  • बच्चे को समस्या-समाधानकर्ता एवं वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में देखना।
  • बच्चों की सीखने संबंधी वैकल्पिक अवधारणाएँ।
  • बच्चों की गलतियों को सीखने की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण के रूप में समझना।
  • संज्ञान एवं भावनाएँ।
  • प्रेरणा एवं अधिगम।
  • सीखने को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत एवं पर्यावरणीय कारक।

II. गणित एवं विज्ञान — 60 प्रश्न

गणित — 30 प्रश्न

विषय-वस्तु — 20 प्रश्न

संख्या पद्धति:

  • हमारी संख्याओं को जानना।
  • संख्याओं के साथ खेलना।
  • पूर्ण संख्याएँ।
  • ऋणात्मक संख्याएँ एवं पूर्णांक।
  • भिन्न।

बीजगणित:

  • बीजगणित का परिचय।
  • अनुपात एवं समानुपात।

गणित एवं विज्ञान

गणित — ज्यामिति

  • मूल ज्यामितीय अवधारणाएँ — 2-D।
  • प्रारंभिक आकृतियों को समझना — 2-D एवं 3-D।
  • सममिति — परावर्तन।
  • निर्माण — सीधी किनारी/स्केल, प्रोटेक्टर और कंपास का प्रयोग।
  • क्षेत्रमिति।
  • आँकड़ों का प्रबंधन।

गणित — शिक्षाशास्त्रीय मुद्दे — 10 प्रश्न

  • गणित की प्रकृति एवं तार्किक चिंतन।
  • पाठ्यक्रम में गणित का स्थान।
  • गणित की भाषा।
  • सामुदायिक गणित।
  • मूल्यांकन।
  • उपचारात्मक शिक्षण।
  • शिक्षण की समस्याएँ।

विज्ञान — 30 प्रश्न

A. विषय-वस्तु — 20 प्रश्न

भोजन

  • भोजन के स्रोत।
  • भोजन के घटक।
  • भोजन की सफाई।

पदार्थ

  • दैनिक उपयोग की वस्तुओं के पदार्थ।

जीव-जगत

गतिशील वस्तुएँ, लोग एवं विचार।

चीजें कैसे काम करती हैं

  • विद्युत धारा एवं परिपथ।
  • चुंबक।

प्राकृतिक घटनाएँ।

प्राकृतिक संसाधन।

B. विज्ञान — शिक्षाशास्त्रीय मुद्दे — 10 प्रश्न

  • विज्ञान की प्रकृति एवं संरचना।
  • प्राकृतिक विज्ञान के उद्देश्य एवं लक्ष्य।
  • विज्ञान को समझना एवं उसकी सराहना करना।
  • दृष्टिकोण/एकीकृत दृष्टिकोण।
  • अवलोकन, प्रयोग एवं खोज — विज्ञान की विधि।
  • नवाचार।
  • पाठ्य सामग्री/सहायक सामग्री।
  • संज्ञानात्मक, मनोदैहिक एवं भावात्मक मूल्यांकन।
  • समस्याएँ।
  • उपचारात्मक शिक्षण।

III. सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान — 60 प्रश्न

A. विषय-वस्तु — 40 प्रश्न

इतिहास

  • कब, कहाँ और कैसे।
  • प्रारंभिक समाज।
  • प्रथम किसान एवं पशुपालक।
  • प्रथम नगर।
  • प्रारंभिक राज्य।
  • नए विचार।
  • प्रथम साम्राज्य।
  • दूरस्थ देशों के साथ संपर्क।
  • राजनीतिक विकास।
  • संस्कृति एवं विज्ञान।
  • नए राजा एवं राज्य।
  • दिल्ली के सुल्तान।
  • वास्तुकला।
  • साम्राज्य का निर्माण।
  • सामाजिक परिवर्तन।
  • क्षेत्रीय संस्कृतियाँ।
  • कंपनी सत्ता की स्थापना।
  • ग्रामीण जीवन एवं समाज।
  • उपनिवेशवाद एवं जनजातीय समाज।
  • 1857–58 का विद्रोह।
  • महिलाएँ एवं सुधार।
  • जाति व्यवस्था को चुनौती।
  • राष्ट्रवादी आंदोलन।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत।

भूगोल

  • सामाजिक अध्ययन एवं विज्ञान के रूप में भूगोल।
  • ग्रह — सौरमंडल में पृथ्वी।
  • ग्लोब।
  • समग्र पर्यावरण — प्राकृतिक एवं मानव पर्यावरण।
  • वायु।
  • जल।
  • मानव पर्यावरण — बस्तियाँ, परिवहन एवं संचार।
  • संसाधन — प्राकृतिक एवं मानव संसाधन।
  • कृषि।

सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन

  • विविधता।
  • सरकार।
  • स्थानीय सरकार।
  • आजीविका।
  • लोकतंत्र।
  • राज्य सरकार।
  • मीडिया को समझना।
  • लैंगिक मुद्दों को समझना।

सामाजिक विज्ञान एवं भाषा

सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन — शेष विषय

  • संविधान।
  • संसदीय सरकार।
  • न्यायपालिका।
  • सामाजिक न्याय एवं वंचित वर्ग।

सामाजिक विज्ञान — शिक्षाशास्त्रीय मुद्दे — 20 प्रश्न

  • सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन की अवधारणा एवं प्रकृति।
  • कक्षा प्रक्रियाएँ, गतिविधियाँ एवं विमर्श।
  • आलोचनात्मक चिंतन का विकास।
  • पूछताछ एवं अनुभवजन्य साक्ष्य।
  • सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन के शिक्षण की समस्याएँ।
  • स्रोत — प्राथमिक एवं द्वितीयक।
  • परियोजना कार्य।
  • मूल्यांकन।

IV. भाषा-I — 30 प्रश्न

भाषा बोध — 15 प्रश्न

दो अपठित गद्यांश होंगे—एक गद्य या नाटक तथा एक कविता। प्रश्न बोध, निष्कर्ष, व्याकरण एवं मौखिक क्षमता पर आधारित होंगे। गद्यांश साहित्यिक, वैज्ञानिक, कथात्मक या विवेचनात्मक हो सकता है।

भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र — 15 प्रश्न

  • भाषा का अधिगम एवं अर्जन।
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
  • सुनने एवं बोलने की भूमिका।
  • भाषा का कार्य तथा बच्चों द्वारा भाषा का उपकरण के रूप में प्रयोग।
  • IT को एक उपकरण के रूप में प्रयोग करना।
  • भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • विविध कक्षा में भाषा शिक्षण की चुनौतियाँ।
  • भाषा संबंधी कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ एवं विकार।
  • भाषा कौशल।
  • बोलने, सुनने, पढ़ने एवं लिखने के माध्यम से भाषा बोध एवं दक्षता का मूल्यांकन।
  • शिक्षण-अधिगम सामग्री — पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री एवं बहुभाषी कक्षा संसाधन।
  • उपचारात्मक शिक्षण।

V. भाषा-II — 30 प्रश्न

बोध — 15 प्रश्न

दो अपठित गद्यांश होंगे। ये विवेचनात्मक, साहित्यिक, कथात्मक या वैज्ञानिक हो सकते हैं तथा इनमें बोध, व्याकरण एवं मौखिक क्षमता से संबंधित प्रश्न होंगे।

भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र — 15 प्रश्न

  • भाषा का अधिगम एवं अर्जन।
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
  • सुनने एवं बोलने की भूमिका तथा भाषा का कार्य।
  • बच्चों द्वारा भाषा का उपकरण के रूप में प्रयोग।
  • भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका का आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
  • विविध कक्षा में भाषा शिक्षण की चुनौतियाँ।
  • भाषा संबंधी कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ एवं विकार।
  • भाषा कौशल।
  • बोलने, सुनने, पढ़ने एवं लिखने के माध्यम से भाषा बोध एवं दक्षता का मूल्यांकन।
  • शिक्षण-अधिगम सामग्री — पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री एवं बहुभाषी कक्षा संसाधन।
  • उपचारात्मक शिक्षण।

 

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