भारत–कनाडा CEPA वार्ता: संदर्भ शर्तों पर सहमति

भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की दिशा में एक औपचारिक और संरचित कदम उठाते हुए 2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में ‘Terms of Reference’ (ToR) पर हस्ताक्षर किए गए। यह केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि लंबे समय से अपेक्षित द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को ठोस ढाँचे में लाने की प्रक्रिया का प्रारंभ है।

ToR का महत्व और भूमिका

ToR किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते के लिए आधारभूत दस्तावेज होता है, जो वार्ता की दिशा, दायरा, आवृत्ति और पद्धति तय करता है।

  • यह तय करता है कि किन क्षेत्रों पर बातचीत होगी और किस स्तर पर होगी।
  • वार्ता की समयसीमा और प्राथमिकताओं का संकेत देता है।
  • एक संतुलित और पारस्परिक लाभकारी समझौते के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

इस संदर्भ में भारत–कनाडा CEPA का ToR दोनों देशों के बीच स्पष्ट रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

वार्ता की पृष्ठभूमि

यह पहल अचानक नहीं हुई है, बल्कि अक्टूबर 2025 में कनाडा के कनानास्किस में G7 बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई द्विपक्षीय चर्चा का परिणाम है।

  • उस समय दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाई देने पर सहमति जताई थी।
  • ToR पर हस्ताक्षर उसी प्रक्रिया का औपचारिक विस्तार है।

CEPA के दायरे और संभावित क्षेत्र

यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक आर्थिक सहयोग को समाहित करेगा:

  • वस्तु व्यापार (Goods Trade)
  • सेवा क्षेत्र (Services)
  • अन्य नीति क्षेत्र (जैसे निवेश, बौद्धिक संपदा, डिजिटल व्यापार आदि)

यह बहु-आयामी ढाँचा CEPA को एक साधारण FTA से अधिक व्यापक बनाता है।

द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में भारत–कनाडा व्यापार अपनी संभावनाओं के मुकाबले काफी सीमित है:

  • कुल व्यापार (FY 2024-25): लगभग 8.66 अरब डॉलर
    • निर्यात: 4.22 अरब डॉलर
    • आयात: 4.44 अरब डॉलर

प्रधानमंत्री द्वारा 2030 तक इसे 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य अत्यंत महत्वाकांक्षी है, जो मौजूदा स्तर से लगभग छह गुना वृद्धि की मांग करता है। यह लक्ष्य तभी संभव है जब संरचनात्मक बाधाओं को दूर किया जाए।

व्यापार संरचना का विश्लेषण

भारत से कनाडा को निर्यात:

  • औषधि एवं फार्मास्यूटिकल्स
  • लौह एवं इस्पात
  • समुद्री उत्पाद
  • कपास वस्त्र
  • इलेक्ट्रॉनिक सामान
  • रसायन

कनाडा से भारत को आयात:

  • दालें (भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण)
  • कोयला (ऊर्जा जरूरतों के लिए)
  • उर्वरक
  • कच्चा तेल
  • कीमती पत्थर

यह संरचना दर्शाती है कि व्यापार अभी भी पारंपरिक वस्तुओं पर आधारित है और उच्च मूल्य वर्धित क्षेत्रों में विस्तार की आवश्यकता है।

सेवा क्षेत्र की संभावनाएँ

भारत की सेवा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त CEPA के तहत एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है:

  • दूरसंचार
  • कंप्यूटर एवं सूचना सेवाएँ
  • व्यवसायिक सेवाएँ

हालांकि, इन क्षेत्रों में वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब वीजा, डेटा प्रवाह और पेशेवर मान्यता जैसी बाधाओं को दूर किया जाए।

जन-से-जन संबंध (People-to-People Ties)

कनाडा में लगभग 4.25 लाख भारतीय छात्र और एक बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय मौजूद है।

  • यह संबंध आर्थिक सहयोग को सामाजिक आधार प्रदान करते हैं।
  • लेकिन, हाल के वर्षों में कूटनीतिक तनावों ने इन संबंधों को प्रभावित भी किया है, जिसे CEPA के माध्यम से संतुलित करने की कोशिश होगी।

आलोचनात्मक विश्लेषण

  • महत्वाकांक्षा बनाम वास्तविकता: 50 अरब डॉलर का लक्ष्य मौजूदा व्यापार संरचना और बाधाओं को देखते हुए चुनौतीपूर्ण है।
  • संरचनात्मक बाधाएँ: टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर्स, और नियामकीय जटिलताएँ प्रमुख अवरोध हैं।
  • राजनीतिक आयाम: भारत–कनाडा संबंध हाल के वर्षों में राजनीतिक कारणों से तनावपूर्ण रहे हैं, जो वार्ता की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
  • सेवा क्षेत्र में बाधाएँ: वीजा नियम, डेटा स्थानीयकरण और पेशेवर मान्यता जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।