पृष्ठभूमि और महत्व
भारत में प्रस्तावित जनगणना 2027 कई दृष्टियों से ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इस बार जनगणना केवल आंकड़ों के संग्रह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पूरे प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी भी की जाएगी। Registrar General and Census Commissioner of India ने राज्यों को सूचित किया है कि वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष पोर्टल के माध्यम से फील्ड ऑपरेशंस की निगरानी करेंगे, ताकि प्रगति पर नजर रखी जा सके, संभावित देरी या कमियों की पहचान हो सके और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी गतिविधियों को पूरा किया जा सके।
प्रशासनिक ढांचा और मानव संसाधन
आरजी एवं जनगणना आयुक्त मृत्तुंजय कुमार नारायण के अनुसार, लगभग 32 लाख फील्ड फंक्शनरी इस “राष्ट्रीय महत्व के कार्य” को अंजाम देने के लिए तैनात किए जाएंगे। इतने बड़े स्तर पर मानव संसाधन की तैनाती यह दर्शाती है कि जनगणना केवल सांख्यिकीय अभ्यास नहीं, बल्कि नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला है। सीमित समय-सीमा में पूरे देश को कवर करना प्रशासनिक दक्षता और समन्वय की एक बड़ी परीक्षा होगी।
जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस)
जनगणना से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के प्रभावी प्रबंधन और निगरानी के लिए एक समर्पित वेब-आधारित पोर्टल विकसित किया गया है, जिसे Census Management and Monitoring System कहा गया है। यह प्रणाली जनगणना की एंड-टू-एंड मैनेजमेंट सुविधा प्रदान करेगी। इसके अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर उपयोगकर्ताओं का निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल का प्रबंधन, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स और सुपरवाइजरी सर्किल्स का गठन, गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के लिए नियुक्ति पत्र एवं पहचान पत्र तैयार करना, तथा लगभग रियल-टाइम में फील्ड कार्यों की निगरानी शामिल है। इससे पारंपरिक जनगणना की तुलना में पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि की अपेक्षा की जा रही है।
जनगणना का पहला चरण : हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन
जनगणना 2027 का पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन होगा, जो 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में आवास की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। यह चरण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की जनसंख्या गणना की संरचना तैयार होती है। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह से त्रुटियों में कमी और डेटा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
दूसरा चरण : जनसंख्या गणना
दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें जनसंख्या गणना के अंतर्गत जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और जाति से संबंधित विवरण एकत्र किए जाएंगे। यह चरण नीति निर्माण के लिए अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक माना जाता है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कल्याणकारी योजनाओं, आरक्षण नीतियों और संसाधन वितरण की दिशा तय होती है। डिजिटल संग्रहण से आंकड़ों के त्वरित संकलन और विश्लेषण की संभावना बढ़ेगी।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकीकरण
राज्यों को भेजे गए संचार में यह स्पष्ट किया गया है कि जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे डेटा की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता में सुधार होगा। डेटा पूरी तरह डिजिटल माध्यम से एकत्र किया जाएगा, जिसे जनगणना प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है। यह पहल ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया की व्यापक नीति के अनुरूप है।
House Listing Block Creator (HLBC) और जियो-टैगिंग
CMMS के अंतर्गत एक विशेष वेब मैपिंग एप्लिकेशन विकसित किया गया है, जिसे House Listing Block Creator (HLBC) कहा गया है। इसका उद्देश्य हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स का जियो-टैगिंग और सीमांकन करना है। प्रत्येक HLB में लगभग 700 से 800 लोगों को शामिल किए जाने की योजना है। पहली बार जनगणना में नवीनतम सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से “वर्किंग मैप्स” तैयार किए जाएंगे, जिससे बस्तियों और आवासों की स्पष्ट पहचान संभव होगी।
सीमावर्ती और विशेष क्षेत्रों में भू-स्थानिक समाधान
कुछ राज्यों और क्षेत्रों, जैसे उत्तर-पूर्वी राज्य, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और छत्तीसगढ़, में सटीक गांव या नगर सीमाओं की उपलब्धता एक चुनौती रही है। इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न भू-स्थानिक डेटा स्रोतों का उपयोग किया गया है, जिनमें Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana और भारत मैप्स (National Informatics Centre) जैसे सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इससे दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी अधिक सटीक मानचित्रण संभव हो सकेगा।
गणनाकर्ता, मोबाइल ऐप और डेटा सुरक्षा
हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के दौरान गणनाकर्ता अपने व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर विकसित विशेष ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। यह कदम लागत में कमी, त्वरित डेटा ट्रांसफर और प्रशासनिक लचीलापन प्रदान करता है। हालांकि, इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल साक्षरता जैसे मुद्दे भी नीति और प्रशासन के समक्ष महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभरते हैं।
समग्र मूल्यांकन
कुल मिलाकर, जनगणना 2027 भारत की प्रशासनिक क्षमता, डिजिटल अवसंरचना और संघीय समन्वय की एक बड़ी परीक्षा होगी। रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैगिंग और डिजिटल डेटा संग्रह से जहां पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं तकनीकी असमानता, गोपनीयता और क्षेत्रीय विविधताओं से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना भी उतना ही आवश्यक होगा।