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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पूर्व, पूर्वोत्तर एवं उत्तर क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया।
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कार्यक्रम में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब तथा गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या उपस्थित रहीं।
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गृह मंत्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘हिन्दवी स्वराज’ की नींव रखी और स्वभाषा, स्वराष्ट्र व स्वधर्म के मेल से ही पूर्ण स्वराज संभव होता है।
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हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच कोई संघर्ष नहीं है; सभी भाषाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। हिन्दी के सशक्त होने से अन्य भारतीय भाषाएँ भी मजबूत होती हैं।
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नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वभाषा के गौरव और उपयोग को बढ़ावा देने का राष्ट्रीय संकल्प लिया गया है।
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यह धारणा गलत बताई गई कि मातृभाषा में शिक्षा या प्रशासन से विकास और अनुसंधान बाधित होता है; जर्मनी, जापान, फ्रांस, चीन आदि देश अपनी भाषा में कार्य कर विकासशील बने हैं।
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भारत सरकार का निर्णय: प्राथमिक शिक्षा बच्चों को उनकी मातृभाषा में दी जाएगी।
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आचार्य विनोबा भावे के योगदान का उल्लेख—नागरी लिपि को भारतीय बोलियों के संरक्षण का माध्यम बताया गया।
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नागरी लिपि को कंप्यूटर और एआई के लिए वैज्ञानिक व अनुकूल लिपि बताया गया; इसे अपनाने से देश की 2000 से अधिक बोलियाँ संरक्षित हो सकती हैं।
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India AI Impact Summit का उल्लेख—नागरी लिपि और भारतीय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने पर जोर।
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दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एआई-संचालित स्मार्ट चश्मों का वितरण किया गया, जो हिन्दी-बांग्ला सहित कई भाषाओं में पाठ पढ़कर सुनाने में सक्षम हैं।
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उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों को ‘अष्टलक्ष्मी’ कहा गया; 2014 के बाद 21 शांति समझौतों से लगभग 11,000 युवा मुख्यधारा में लौटे।
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उत्तर-पूर्व को “विवाद की भूमि से विकास की भूमि” में बदलने में केन्द्र सरकार की भूमिका रेखांकित की गई।
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उत्तर-पूर्व को भारतीय भाषाओं व राजभाषा के सुदृढ़ीकरण का सबसे उपयुक्त क्षेत्र बताया गया—यहाँ 200+ भाषाएँ/बोलियाँ और समृद्ध जनजातीय संस्कृति है।
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हिन्दी के माध्यम से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले व्यक्तित्वों का उल्लेख—डॉ. भूपेन हजारिका, एस.डी. बर्मन, आर.डी. बर्मन, डैनी डेंजोंगप्पा, जुबिन गर्ग आदि।
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राजभाषा को केवल संवाद की नहीं, बल्कि नीति निर्माण और राष्ट्र निर्माण की भाषा बताया गया।
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राजभाषा विभाग की पहलें—‘बहुभाषी अनुवाद सारथी’, स्मृति आधारित अनुवाद प्रणाली ‘कंठस्थ’ और ‘हिन्दी शब्द-सिंधु’।
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‘हिन्दी शब्द-सिंधु’ में 84,000 शब्द; 13 खंड राष्ट्रपति को समर्पित।
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अभिभावकों से अपील: घर में बच्चों से मातृभाषा में संवाद करें—इससे अभिव्यक्ति, विश्लेषण, निर्णय-क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होता है।