ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर NGT का निर्णय

National Green Tribunal (NGT) का निर्णय

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सोमवार को लगभग 81,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी। अधिकरण ने इसे “रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि परियोजना को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति में “पर्याप्त सुरक्षा उपाय” शामिल हैं।

भविष्य की परियोजनाओं के लिए नज़ीर
यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित भविष्य की रणनीतिक परियोजनाओं के लिए एक संदर्भ बिंदु (reference point) बन सकता है।

परियोजना का आकार और पर्यावरणीय प्रभाव
यह लगभग 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना है, जिसके लिए करीब 130 वर्ग किलोमीटर वन भूमि का विचलन किया जाएगा और लगभग 10 लाख पेड़ों की कटाई होगी। इससे पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस और तेज़ हो गई है।

Great Nicobar Island का भौगोलिक महत्व
ग्रेट निकोबार द्वीप का कुल क्षेत्रफल लगभग 910 वर्ग किलोमीटर है। यह भारत के सबसे दक्षिणी बिंदु Indira Point का भी स्थान है, जो इसे रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

सरकार का मुख्य उद्देश्य
केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप को एक प्रमुख आर्थिक और रक्षा (Economic & Defence Hub) के रूप में विकसित करना है।

परियोजना के चार प्रमुख स्तंभ
यह लक्ष्य चार मुख्य घटकों पर आधारित है—

    • एकीकृत टाउनशिप (जिसमें रक्षा सुविधाएँ शामिल होंगी)
    • एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट
    • एक सिविल एवं सैन्य हवाई अड्डा
    • 450 MVA क्षमता का गैस एवं सौर ऊर्जा आधारित विद्युत संयंत्र

कार्यान्वयन एजेंसी
प्रारंभ में इस परियोजना को NITI Aayog द्वारा आगे बढ़ाया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी कार्यान्वयन एजेंसी Andaman and Nicobar Island Integrated Development Corp Ltd (ANIIDCO) है।

क्षेत्रवार भूमि उपयोग

  • लगभग 149 वर्ग किलोमीटर: एकीकृत टाउनशिप
  • 8.45 वर्ग किलोमीटर: नया हवाई अड्डा
  • 7.66 वर्ग किलोमीटर: ट्रांसशिपमेंट पोर्ट
  • 0.39 वर्ग किलोमीटर: विद्युत संयंत्र

एकीकृत टाउनशिप की विशेषताएँ
इस टाउनशिप में आवासीय, वाणिज्यिक, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और रक्षा से जुड़ी सुविधाएँ शामिल होंगी, जिससे द्वीप का समग्र विकास किया जा सके।

ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और पर्यावरणीय चिंता
ट्रांसशिपमेंट पोर्ट ग्रेट निकोबार के दक्षिणी छोर पर Galathea Bay में प्रस्तावित है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है, जहाँ लेदरबैक कछुओं (Leatherback Turtles) के प्रमुख घोंसला स्थल हैं तथा यहीं से गालाथिया नदी समुद्र में मिलती है।

समग्र आकलन
NGT की अनुमति से परियोजना को कानूनी बल मिला है, किंतु इसके संभावित पर्यावरणीय, जैव-विविधता एवं आदिवासी प्रभावों को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। यह मामला विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस का एक प्रमुख उदाहरण बन गया है।