भारत इस वर्ष के अंत तक दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक (Rare Earth Permanent Magnets – REPM) का घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू करने जा रहा है। यह कदम भारत की औद्योगिक, तकनीकी और सामरिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
REPM का महत्व
REPM अत्यधिक शक्ति वाले चुंबक होते हैं, जिनका उपयोग कई उन्नत और रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे–
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इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
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नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ (पवन टर्बाइन आदि)
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इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग
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एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र
इन चुंबकों के बिना आधुनिक हरित तकनीक और उन्नत रक्षा प्रणालियों का विकास संभव नहीं है।
वैश्विक परिदृश्य और चीन का वर्चस्व
वर्तमान में REPM के निर्माण और इनके लिए आवश्यक कच्चे माल (Rare Earth Minerals) के प्रसंस्करण पर चीन का अत्यधिक वर्चस्व है।
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चीन का वैश्विक उत्पादन और प्रसंस्करण में 90% से अधिक हिस्सा है।
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यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिमपूर्ण है, क्योंकि किसी एक देश का एकाधिकार रणनीतिक निर्भरता पैदा करता है।
भारत सरकार की पहल
इस निर्भरता को कम करने के लिए भारत सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं—
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नवंबर में ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य REPM के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है।
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चार राज्यों को महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए चिन्हित किया गया है:
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आंध्र प्रदेश
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ओडिशा
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गुजरात
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महाराष्ट्र
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ये राज्य खनिज संसाधनों, बंदरगाहों, औद्योगिक ढांचे और लॉजिस्टिक सुविधाओं के लिहाज से उपयुक्त माने गए हैं।
रणनीतिक उद्देश्य
इन पहलों का मुख्य उद्देश्य है—
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वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला (Alternative Supply Chain) का निर्माण
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किसी एक देश द्वारा महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला पर एकाधिकार को रोकना
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भारत को आत्मनिर्भर (Atmanirbhar Bharat) बनाना
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EV, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में घरेलू उद्योगों को मजबूती देना
Source: Indian Express