Adani Group ने नियामकीय फाइलिंग के माध्यम से जानकारी दी कि उसकी कंपनी Adani Power Limited ने एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई Adani Atomic Energy Limited का गठन किया है। यह भारत में पहली बार है जब किसी बड़े निजी विद्युत उत्पादक समूह ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में औपचारिक रूप से कदम रखा है।
यह घटनाक्रम दिसंबर 2025 में पारित Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act के बाद सामने आया है। यह कानून पुराने Atomic Energy Act का स्थान लेता है और पहली बार निजी कंपनियों को भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित करने की अनुमति देता है। साथ ही, यह विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रमों (Joint Ventures) के जरिए तकनीकी सहयोग का भी मार्ग खोलता है।
इस कानून और अडानी समूह की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। संसदीय बहस के दौरान कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने आरोप लगाया कि SHANTI Act को विशेष रूप से अडानी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है।
इसी क्रम में कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया मंच X पर दावा किया कि यह विधेयक जल्दबाजी में पारित किया गया और इसका उद्देश्य “पसंदीदा औद्योगिक समूह” को लाभ देना था।
निजी क्षेत्र की भागीदारी का संकेत फरवरी 2025 में ही मिल गया था, जब वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भारत की “ऊर्जा संक्रमण” (Energy Transition) रणनीति के तहत निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में शामिल करने की बात कही थी। सरकार ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
वर्तमान में भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.8 गीगावॉट है, जो कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3% योगदान देती है। सरकार का दावा है कि अगले एक दशक में यह क्षमता बढ़कर 32 गीगावॉट तक पहुंच सकती है।
Source: The Hindu