आर्टेमिस मिशन की परीक्षा: तकनीकी चुनौतियाँ, मानवयुक्त चंद्र यात्रा और वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा

नासा का NASA द्वारा संचालित Artemis program एक बार फिर तकनीकी अड़चनों के कारण चर्चा में है। हालिया परीक्षण के दौरान, उस रॉकेट प्रणाली में नई समस्या सामने आई है जो 50 वर्षों के बाद पहली बार मानवों को चंद्रमा के चारों ओर ले जाने वाली है। यह समस्या तब सामने आई जब इंजीनियर Space Launch System के तरल हाइड्रोजन टैंक को आंशिक रूप से भरने का परीक्षण कर रहे थे। यह परीक्षण विशेष रूप से हाल ही में बदले गए सील (seals) की प्रभावशीलता जाँचने के लिए किया गया था, जिन्हें पहले के ‘वेट ड्रेस रिहर्सल’ के दौरान हुए हाइड्रोजन रिसाव के बाद बदला गया था।

तकनीकी मूल्यांकन के दौरान ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट में गड़बड़ी के कारण हाइड्रोजन का प्रवाह अपेक्षा से कम पाया गया। यद्यपि नासा ने यह स्पष्ट किया कि कई महत्वपूर्ण उद्देश्य पूरे हुए और उन बिंदुओं से उपयोगी डेटा एकत्र किया गया जहाँ पहले रिसाव हुआ था, फिर भी यह नया अवरोध पहले से ही विलंब झेल रहे परीक्षण कार्यक्रम के लिए एक और जटिलता बन गया है। प्रारंभिक जांच में संदेह है कि ईंधन आपूर्ति प्रणाली में लगा एक फिल्टर जाम हो गया था, जिसके कारण प्रवाह बाधित हुआ। अब इंजीनियर प्रभावित लाइनों की सफाई करेंगे और फिल्टर को बदलने के बाद यह तय किया जाएगा कि इस महीने के अंत में दूसरा पूर्ण ‘वेट ड्रेस रिहर्सल’ कब किया जाए।

मानवयुक्त चंद्र अभियानों के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो अब तक केवल United States ही सफलतापूर्वक मनुष्यों को चंद्रमा तक भेज पाया है। 1969 से 1972 के बीच Apollo missions के तहत छह अभियानों में कुल बारह अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्र सतह पर कदम रखा, जिनमें Apollo 11 ने जुलाई 1969 में पहली मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग की। इसके बाद से मानव चंद्र यात्रा का सिलसिला रुक गया, जिसे पुनः आरंभ करने का प्रयास आर्टेमिस कार्यक्रम के माध्यम से किया जा रहा है।

आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत Artemis II एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। यह मिशन Orion spacecraft के माध्यम से अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से पहले की तुलना में कहीं अधिक दूर ले जाएगा और उन्हें चंद्रमा के निकट से उड़ान भरने का अवसर देगा। लगभग आधी सदी बाद यह पहला अवसर होगा जब मनुष्य चंद्रमा के पास से गुजरेंगे। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उस ‘फार साइड’ का अवलोकन करेंगे जो हमेशा पृथ्वी से दूर रहता है। लगभग तीन घंटे तक वे प्राचीन लावा मैदानों, प्रभाव क्रेटरों और भू-आकृतिक संरचनाओं की तस्वीरें लेंगे और उनका दस्तावेजीकरण करेंगे। यह अभ्यास भविष्य में चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर होने वाले अभियानों के लिए वैज्ञानिक और परिचालन दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

नासा के अनुसार, आर्टेमिस-2 का सबसे प्रारंभिक संभावित प्रक्षेपण मार्च में हो सकता है। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल होंगे। मार्च 6 से 11 के बीच केवल पाँच संभावित लॉन्च विंडो चिन्हित की गई हैं; यदि इनमें से कोई भी अवसर चूकता है तो मिशन अप्रैल तक टल सकता है, जिससे पहले से विलंबित कार्यक्रम पर और दबाव बढ़ेगा। विशेष रूप से यह मिशन 2022 से चली आ रही हाइड्रोजन रिसाव की समस्या के समाधान की वास्तविक परीक्षा भी है, जिस पर नासा ने तीन वर्षों तक सुधार कार्य किए हैं।

वैश्विक परिदृश्य में देखें तो चंद्रमा पर मानव भेजने की प्रतिस्पर्धा अब बहुपक्षीय होती जा रही है। China ने अपने Chang’e Project के तहत 2030 तक दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य घोषित किया है। वहीं India ने ISRO के स्पेस विज़न 2047 के अंतर्गत 2040 तक मानव को चंद्रमा भेजने की योजना व्यक्त की है। इस संदर्भ में आर्टेमिस कार्यक्रम केवल वैज्ञानिक महत्व का नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक, तकनीकी नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी प्रतीक है।

निष्कर्षतः, आर्टेमिस-2 से जुड़ी वर्तमान तकनीकी समस्याएँ यह दर्शाती हैं कि अत्याधुनिक अंतरिक्ष अभियानों में जोखिम और विलंब स्वाभाविक हैं। फिर भी, यदि इन चुनौतियों का समाधान सफलतापूर्वक किया जाता है, तो यह मिशन मानव अंतरिक्ष उड़ानों के नए युग की नींव रखेगा और चंद्रमा को भविष्य की अंतरग्रहीय यात्राओं के लिए एक स्थायी आधार के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।