‘न्यू स्टार्ट’ (New Strategic Arms Reduction Treaty) अमेरिका और रूस के बीच की गई एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण संधि थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों द्वारा तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों की संख्या को सीमित करना था। यह संधि अमेरिका और रूस के बीच प्रभावी रूप से लागू अंतिम परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता मानी जाती है। न्यू स्टार्ट का नाम मूल “Strategic Arms Reduction Treaty” से लिया गया है, जिसे START-I कहा जाता है। START-I पर 1991 में अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1994 में लागू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य शीत युद्ध की समाप्ति के बाद दोनों महाशक्तियों के विशाल परमाणु शस्त्रागार में कटौती करना था।
START-I के अंतर्गत प्रत्येक पक्ष को अधिकतम 6,000 परमाणु वॉरहेड्स और 1,600 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात करने की अनुमति थी। यह संधि 2009 में समाप्त हो गई, जिसके बाद पहले Strategic Offensive Reductions Treaty (SORT), जिसे मॉस्को संधि भी कहा जाता है, लागू हुई और बाद में इसे न्यू स्टार्ट संधि द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। न्यू स्टार्ट का आधिकारिक नाम “Treaty between the United States of America and the Russian Federation on Measures for the Further Reduction and Limitation of Strategic Offensive Arms” था। यह संधि 5 फरवरी 2011 को लागू हुई और इसका उद्देश्य अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक मार करने वाले रणनीतिक परमाणु हथियारों पर नए और सत्यापन योग्य प्रतिबंध लगाना था।
न्यू स्टार्ट के अनुसार, अमेरिका और रूस को 5 फरवरी 2018 तक संधि द्वारा निर्धारित केंद्रीय सीमाओं को पूरा करना था और इसके बाद संधि की वैधता अवधि के दौरान उन्हीं सीमाओं के भीतर बने रहना था। बाद में दोनों देशों ने आपसी सहमति से इस संधि को 4 फरवरी 2026 तक बढ़ाने पर सहमति जताई। संधि के तहत केंद्रीय सीमाओं में 700 तैनात ICBMs, SLBMs और परमाणु हथियारों से लैस भारी बमवर्षक, 1,550 तैनात परमाणु वॉरहेड्स (जिसमें प्रत्येक भारी बमवर्षक को एक वॉरहेड के रूप में गिना जाता है) तथा 800 तैनात और गैर-तैनात ICBM लॉन्चर, SLBM लॉन्चर और भारी बमवर्षक शामिल थे। दोनों देशों ने 2018 तक इन सीमाओं का पालन किया और उसके बाद भी इन्हें बनाए रखा।
हालाँकि, समय के साथ न्यू स्टार्ट संधि को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से 2023 में, जब यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने न्यू स्टार्ट के तहत निरीक्षण गतिविधियों को निलंबित कर दिया। इसके बाद सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संधि के लिए एक वर्ष के स्वैच्छिक विस्तार का प्रस्ताव रखा। लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण मास्को और वाशिंगटन के बीच संबंधों में आए तीखे तनाव के चलते न्यू स्टार्ट के नवीनीकरण को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप यह संधि समाप्त हो गई और वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई नया परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता प्रभावी रूप से मौजूद नहीं है।
न्यू स्टार्ट से आगे व्यापक वैश्विक संदर्भ में परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty – NPT) का विशेष महत्व है। इस संधि पर 1968 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1970 में लागू हुई। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और उनसे जुड़ी तकनीक के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और दीर्घकालिक परमाणु निरस्त्रीकरण को प्रोत्साहित करना है। NPT के अनुसार, परमाणु हथियार संपन्न राज्य वह है जिसने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु हथियार या अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरण का परीक्षण किया हो। इस श्रेणी में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ (अब रूस) और चीन आते हैं।
अब तक 191 देशों ने NPT को अपनाया है, लेकिन भारत ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था और इसके बाद उसने परमाणु अप्रसार के संदर्भ में सार्वभौमिकता के सिद्धांत पर जोर दिया। भारत का तर्क रहा है कि NPT में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों को विशेषाधिकार दिए गए हैं और 1967 की कट-ऑफ तिथि मनमानी है, जिससे यह संधि भेदभावपूर्ण बन जाती है। इसी कारण NPT को वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना भी करना पड़ा है।
Source: Indian Express