जापान की सानाए ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री चुना

ऐतिहासिक निर्वाचन

जापान की संसद ने अक्टूबर 2025 को Sanae Takaichi को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित किया। वे Shigeru Ishiba का स्थान लेंगी। उनके निर्वाचन के साथ ही जुलाई में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की चुनावी हार के बाद चला आ रहा तीन महीने का राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो गया।

मतदान परिणाम और संसदीय प्रक्रिया

निचले सदन में हुए मतदान में सानाए ताकाइची को 237 मत प्राप्त हुए, जो साधारण बहुमत से चार अधिक थे। उनके मुकाबले सबसे बड़े विपक्षी दल कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के नेता Yoshihiko Noda को 149 मत मिले। परिणाम घोषित होते ही ताकाइची ने खड़े होकर गहरा अभिवादन किया।

गठबंधन राजनीति और सत्ता संतुलन

ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना Liberal Democratic Party और ओसाका आधारित दक्षिणपंथी दल Japan Innovation Party (इशिन नो काई) के बीच हुए गठबंधन से संभव हो पाया। हालांकि यह गठबंधन संसद के दोनों सदनों में पूर्ण बहुमत से अभी भी कम है, जिसके चलते सरकार को कानून पारित कराने के लिए अन्य विपक्षी दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

कोमेतो से अलगाव और LDP की चुनौती

LDP को लंबे समय से समर्थन देने वाली बौद्ध समर्थित पार्टी Komeito के गठबंधन से बाहर होने के बाद सत्ता बनाए रखना कठिन हो गया था। कोमेतो ने चुनावी हार, फंड घोटालों और ताकाइची के कुछ वैचारिक रुखों को अलगाव का कारण बताया।

नीति दृष्टिकोण और बयान

गठबंधन समझौते के समय सानाए ताकाइची ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक स्थिरता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना मजबूत अर्थव्यवस्था और प्रभावी कूटनीति संभव नहीं है। गठबंधन के नीति दस्तावेज़ में उनके राष्ट्रवादी और कठोर सुरक्षा दृष्टिकोण की झलक मिलती है।

कैबिनेट गठन और आंतरिक शक्ति संतुलन

64 वर्षीय ताकाइची शीघ्र ही अपना मंत्रिमंडल पेश करेंगी, जिसमें LDP के प्रभावशाली नेता Taro Aso के समर्थक और पार्टी नेतृत्व चुनाव में उनका साथ देने वाले नेता शामिल होंगे। जापान इनोवेशन पार्टी फिलहाल मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी।

तात्कालिक चुनौतियां

प्रधानमंत्री के रूप में ताकाइची के सामने बढ़ती महंगाई, आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज तैयार करना, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ वार्ता और क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों में भागीदारी जैसी तात्कालिक चुनौतियां हैं।

वैचारिक रुख और आलोचनाएं

हालांकि वे जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन्होंने लैंगिक समानता या विविधता को प्राथमिक एजेंडा नहीं बनाया है। वे शाही उत्तराधिकार में केवल पुरुष उत्तराधिकार का समर्थन करती हैं, समलैंगिक विवाह और विवाहित जोड़ों के अलग उपनामों का विरोध करती हैं।

शिंजो आबे की विरासत और विदेश नीति

सानाए ताकाइची दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री Shinzo Abe की करीबी मानी जाती हैं और उनकी नीतियों—मजबूत सेना, अर्थव्यवस्था और शांतिवादी संविधान में संशोधन—को आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है। हालांकि संसद में कमजोर बहुमत के कारण इन लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यासुकुनी श्राइन और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

ताकाइची के यासुकुनी श्राइन में नियमित प्रार्थनाओं और जापान के युद्धकालीन अतीत पर उनके संशोधनवादी विचारों को लेकर चीन और दक्षिण कोरिया की ओर से पहले भी आपत्ति जताई जाती रही है। हाल के दिनों में उन्होंने अपनी भाषा कुछ नरम की है और प्रत्यक्ष दौरे के बजाय प्रतीकात्मक धार्मिक अर्पण किया।

यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।