भारत ने भूटान के साथ अपनी पहली सीमा-पार रेल परियोजनाओं की घोषणा करते हुए द्विपक्षीय संपर्क के एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करना और आर्थिक सहभागिता को नई गति देना है। लगभग 4,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली यह पहल भारत–भूटान संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
प्रस्तावित रेल परियोजनाओं का स्वरूप
इन रेल परियोजनाओं के तहत भूटान के गेलेफू और समत्से शहरों को भारत के कोकराझार (असम) और बनारहाट (पश्चिम बंगाल) से जोड़ा जाएगा। यह पहली बार है जब भारत और भूटान के बीच सीधे रेलवे संपर्क की योजना बनाई गई है, जिससे माल परिवहन और व्यापारिक आवाजाही को सुगम बनाया जा सकेगा।
द्विपक्षीय वार्ता और घोषणा की पृष्ठभूमि
इस पहल की घोषणा उस समय की गई जब भारत के विदेश सचिव Vikram Misri ने भूटान की विदेश सचिव Aum Pema Choden के साथ परामर्श किया। इन चर्चाओं में भारत–भूटान द्विपक्षीय सहयोग के सभी प्रमुख आयामों की समीक्षा की गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इसे दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रमाण बताया।
ऊर्जा सहयोग में प्रगति
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया, विशेष रूप से 1,020 मेगावाट की पुनात्संगछू-II जलविद्युत परियोजना की सभी छह इकाइयों के सफलतापूर्वक चालू होने को। यह उपलब्धि भारत–भूटान संयुक्त ऊर्जा साझेदारी दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी गई।
भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना में सहयोग
चर्चाओं में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत भारत समर्थित विकास परियोजनाओं की प्रगति पर भी जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये परियोजनाएं निरंतर आगे बढ़ रही हैं और भूटान की जनता को ठोस लाभ प्रदान कर रही हैं। भारत ने इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है, जो पिछली योजना की तुलना में दोगुनी है।
भारत–भूटान संबंधों की विशेष प्रकृति
प्रेस वार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत और भूटान के संबंधों को “असाधारण विश्वास, पारस्परिक सम्मान और समझ” पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि यह संबंध सांस्कृतिक निकटता, जन-से-जन संपर्क और साझा विकास एवं सुरक्षा हितों से मजबूत हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रेल परियोजनाओं पर सहमति प्रधानमंत्री Narendra Modi की पिछले वर्ष भूटान यात्रा के दौरान बनी थी।
रेल संपर्क का आर्थिक और रणनीतिक महत्व
इस अवसर पर रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि भूटान का अधिकांश आयात-निर्यात व्यापार भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से होता है। ऐसे में निर्बाध रेल संपर्क भूटान की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समत्से और गेलेफू को भूटान की विकास योजनाओं में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य और रणनीतिक संकेत
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भूटान में चीन की रणनीतिक रुचि बढ़ रही है। ऐसे परिदृश्य में भारत की यह पहल भूटान के साथ अपनी दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
आगे की दिशा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जो दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और विशिष्ट मित्रता की परंपरा को दर्शाती है। अगली विकास सहयोग वार्ता भूटान की राजधानी Thimphu में आपसी सहमति से निर्धारित तिथि पर आयोजित की जाएगी।