कर्नाटक भारत के GenAI स्टार्टअप इकोसिस्टम का अग्रणी केंद्र

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, कर्नाटक ने भारत के उभरते डीप-टेक और जेनरेटिव एआई (GenAI) स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपना नेतृत्व और मजबूत कर लिया है। देश के कुल GenAI स्टार्टअप्स में से लगभग 39 प्रतिशत अकेले कर्नाटक में स्थित हैं, जिससे यह राज्य इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हब बन गया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत का टेक्नोलॉजी स्टार्टअप इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बन चुका है। सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2025 की पहली छमाही में GenAI स्टार्टअप्स की संख्या तीन गुना बढ़कर 890 हो गई, जो 2024 की पहली छमाही में 240 थी।

GenAI और डीप-टेक क्षेत्र में निवेश भी तेज़ी से बढ़ा है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Tracxn के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक (YTD) इस सेक्टर में 18 फंडिंग राउंड्स के ज़रिये 76.4 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है। इसके अलावा, कैलेंडर वर्ष 2024 में डीप-टेक इंडस्ट्री की फंडिंग में 78 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कर्नाटक की मजबूत शैक्षणिक संरचना इस नवाचार-आधारित इकोसिस्टम को समर्थन देती है, जहाँ देश में सबसे अधिक 43 राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय स्थित हैं, जो कुशल मानव संसाधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक की सफलता भारत के उस रणनीतिक बदलाव का अहम हिस्सा है, जिसमें देश “बैक-ऑफिस” सेवाओं से आगे बढ़कर “एआई फ्रंट-ऑफिस” बनने की ओर अग्रसर है। जहाँ कई क्षेत्र अभी तकनीक के उपभोक्ता मात्र हैं, वहीं कर्नाटक वैश्विक नवप्रवर्तक (Global Innovator) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस परिवर्तन को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े निवेशों का समर्थन मिल रहा है। ₹1 लाख करोड़ की आरडीआई (RDI) पहल के तहत डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से उन्नत तकनीकी अनुसंधान को वित्तपोषित किया जा रहा है, जो स्टार्टअप्स के लिए पहले से मौजूद फंड ऑफ फंड्स को और मजबूत करता है।

यह विकास केवल बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्नाटक के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी डीप-टेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र 2047 तक 44 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है, जिसमें 300 से अधिक स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस क्षेत्र में भी कर्नाटक अग्रणी है, जहाँ बेंगलुरु एक प्रमुख नवाचार केंद्र है और बेलगावी एक उभरता हुआ एयरोस्पेस हब बन रहा है।

अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए सर्वेक्षण में “रणनीतिक अपरिहार्यता” (Strategic Indispensability) की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिसमें वैश्विक कंपनियाँ भारतीय उत्पादन और आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भर हों। कर्नाटक के हाई-टेक क्लस्टर्स इस दिशा में एक तरह का “स्ट्रेस टेस्ट” हैं, जो राज्य से स्थिर नीतियाँ, विश्वसनीय बुनियादी ढाँचा और उच्च गुणवत्ता मानकों की माँग करते हैं—ऐसे मानक जिनसे किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।