केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी Department of Personnel and Training (DoPT) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 ने सरकारी सेवाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व की एक विस्तृत और विचारोत्तेजक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार में कार्यरत ग्रुप C के सफाई कर्मियों में से 76 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार के सबसे निचले और श्रम-सघन कार्यों में सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी अत्यधिक केंद्रित है, जो ऐतिहासिक सामाजिक संरचनाओं की निरंतरता की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में ग्रुप A यानी सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर SC, ST और OBC कर्मचारियों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। 1 जनवरी 2024 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ग्रुप A पदों में SC की भागीदारी 14.20 प्रतिशत, ST की 6.54 प्रतिशत और OBC की 19.14 प्रतिशत रही। कुल मिलाकर, SC, ST और OBC मिलकर ग्रुप A पदों का लगभग 39.88 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जो यह दिखाता है कि ऊंचे पदों पर प्रतिनिधित्व अब भी आरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों से पीछे है।
DoPT के नियमों के तहत केंद्र सरकार में सीधी भर्ती के दौरान SC के लिए 15 प्रतिशत, ST के लिए 7.5 प्रतिशत, OBC के लिए 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि रिपोर्ट में EWS कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा कोई आंकड़ा शामिल नहीं किया गया है, जिससे इस नए आरक्षण वर्ग की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं।
अन्य श्रेणियों पर नजर डालें तो ग्रुप C (सफाई कर्मियों को छोड़कर) पदों में SC की हिस्सेदारी 16.75 प्रतिशत, ST की 8.94 प्रतिशत और OBC की 27.29 प्रतिशत है। वहीं ग्रुप B पदों में SC 16.20 प्रतिशत, ST 7.63 प्रतिशत और OBC 21.95 प्रतिशत हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे पदों का स्तर ऊंचा होता है, वैसे-वैसे सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की हिस्सेदारी में गिरावट आती जाती है।
कुल मिलाकर, 80 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत 32.52 लाख कर्मचारियों में SC का प्रतिनिधित्व 16.84 प्रतिशत, ST का 8.70 प्रतिशत और OBC का 26.32 प्रतिशत दर्ज किया गया है। ये आंकड़े 2018-19 की तुलना में कुछ अहम बदलाव भी दिखाते हैं। जहां SC कर्मचारियों की हिस्सेदारी 17.49 प्रतिशत से घटकर 16.84 प्रतिशत हो गई है, वहीं ST की हिस्सेदारी में हल्की वृद्धि हुई है। सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी OBC वर्ग में देखी गई है, जिनका प्रतिनिधित्व 21.57 प्रतिशत से बढ़कर 26.32 प्रतिशत हो गया है।
यह रिपोर्ट एक और कारण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2018-19 के बाद पहली बार DoPT ने इतनी बड़ी संख्या में मंत्रालयों और विभागों से संपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। पिछले कुछ वर्षों में संसदीय समितियों को दिए गए बयानों में DoPT ने माना था कि समय पर आंकड़े उपलब्ध न होने के कारण रिपोर्ट अधूरी रह जाती थी। इस बार विस्तृत आंकड़ों का प्रकाशन सरकारी सेवाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर एक व्यापक और पारदर्शी चर्चा का आधार प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, ये आंकड़े यह सवाल उठाते हैं कि क्या सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ सभी स्तरों पर समान रूप से पहुंच रहा है। जहां निचले स्तरों पर SC, ST और OBC की भारी उपस्थिति दिखती है, वहीं नीति-निर्माण और प्रशासन के शीर्ष स्तरों पर उनकी सीमित भागीदारी सामाजिक न्याय की दिशा में अभी भी लंबा रास्ता तय किए जाने की याद दिलाती है।
Source: The Hindu