प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग प्रमुख रहे। यह बैठक पुतिन की भारत यात्रा और वार्षिक BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने से लगभग एक सप्ताह पहले हुई।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच लगभग दो वर्षों के बाद यह पहली बैठक थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच SCO शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय बैठक निर्धारित की गई थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के व्यापक आयामों की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC) की सफल बैठक आयोजित हुई थी और दोनों नेताओं की बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक से कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान क्रेमलिन में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी थीं।
प्रधानमंत्री मोदी की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की भी संभावना जताई गई। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक को लेकर अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में चीन, रूस और चार मध्य एशियाई देशों द्वारा एक सुरक्षा सहयोग मंच के रूप में की गई थी। पिछले लगभग ढाई दशकों में संगठन के आकार और प्रभाव में वृद्धि हुई है। हालांकि, इसके उद्देश्यों और कार्यक्रमों को लेकर अक्सर स्पष्टता की कमी देखी जाती है।
SCO वर्तमान में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक एवं रणनीतिक समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।
