20 फरवरी को Indian Ocean Naval Symposium (IONS) का 9वां प्रमुखों का सम्मेलन आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) के कई देशों के नौसेना प्रमुखों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह उच्चस्तरीय सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) तथा MILAN 2026 के साथ आयोजित किया गया, जिससे इसकी रणनीतिक और कूटनीतिक महत्ता और अधिक बढ़ गई।
अध्यक्षता एवं नेतृत्व
सम्मेलन के दौरान IONS की अध्यक्षता रॉयल थाई नेवी के नौसेना प्रमुख द्वारा ग्रहण की गई।
भारत 2026–2028 की अवधि के लिए इस मंच का नेतृत्व करेगा। यह IONS के इतिहास में भारत का दूसरा कार्यकाल होगा। इससे पहले IONS की स्थापना वर्ष 2008 में नई दिल्ली में हुई थी, जब भारत ने इसकी अगुवाई की थी। यह तथ्य भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति और क्षेत्रीय नेतृत्व को दर्शाता है।
IONS का स्वरूप और उद्देश्य
IONS एक स्वैच्छिक, समावेशी और सहयोगात्मक मंच है, जो भारतीय महासागर क्षेत्र की नौसेनाओं को एक साथ लाता है।
इस मंच का प्रमुख उद्देश्य—
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समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना
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नौसेना सहयोग को बढ़ावा देना
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मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) में समन्वय
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साझा समुद्री चुनौतियों पर विचार-विमर्श
IONS किसी सैन्य गठबंधन की तरह नहीं, बल्कि विश्वास निर्माण और सहयोग बढ़ाने वाला मंच है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
सम्मेलन में प्रमुख विमर्श
सम्मेलन में निम्नलिखित मुद्दों पर विशेष चर्चा की गई—
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समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना और समुद्री आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियाँ
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समुद्री मार्गों की सुरक्षा (Sea Lanes of Communication)
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क्षेत्रीय देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के उपाय
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नौसेनाओं के बीच समन्वय, सूचना साझा करना और संयुक्त अभ्यास
भारत के लिए महत्व
यह सम्मेलन भारत की “सागर” (Security and Growth for All in the Region) दृष्टि को आगे बढ़ाने में सहायक है।
IONS के माध्यम से भारत—
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भारतीय महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में अपनी भूमिका सुदृढ़ करता है
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क्षेत्रीय सहयोग और विश्वास निर्माण को बढ़ावा देता है
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बहुपक्षीय समुद्री कूटनीति में अपनी नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करता है