समग्र परिदृश्य
भारत की अर्थव्यवस्था 2025–26 में मजबूत गति पर बनी हुई है। उच्च जीडीपी वृद्धि, नियंत्रित मुद्रास्फीति, औद्योगिक विस्तार, बेहतर रोज़गार संकेतक और निर्यात में सुधार ने भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है।
जीडीपी वृद्धि
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वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी 8.2% रहने का अनुमान।
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पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर) में 8% वृद्धि, जो पिछले वर्ष की 6.1% से अधिक है।
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द्वितीयक (7.6–8.1%) और तृतीयक (9% से अधिक) क्षेत्रों ने वृद्धि को मजबूती दी।
मुद्रास्फीति में नरमी
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अक्टूबर 2025 में सीपीआई 0.25%, वर्तमान श्रृंखला का सबसे निचला स्तर।
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खाद्य मुद्रास्फीति में तेज गिरावट मुख्य कारण।
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डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति भी (-)1.21% रही।
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आरबीआई ने रेपो दर 5.50% पर बनाए रखी।
औद्योगिक उत्पादन
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सितंबर 2025 में आईआईपी 4.0% बढ़ा।
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विनिर्माण क्षेत्र में 4.8% की वृद्धि।
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प्रमुख योगदान:
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मूल धातु निर्माण
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विद्युत उपकरण
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मोटर वाहन उद्योग
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रोज़गार और श्रम बाज़ार
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अक्टूबर 2025 में श्रम बल भागीदारी दर 55.4%, छह माह का उच्चतम स्तर।
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महिला भागीदारी और औपचारिक रोज़गार में सुधार।
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EPFO के तहत जुलाई 2025 में 21 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े।
विनिर्माण और सरकारी पहल
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पीएलआई योजना के तहत बड़े पैमाने पर निवेश और उत्पादन बढ़ा।
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मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, जीएसटी सुधार और राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन से उद्योग को समर्थन।
निर्यात प्रदर्शन
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अप्रैल–अक्टूबर 2025 में कुल निर्यात 4.84% बढ़कर 491.8 अरब डॉलर।
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सेवाओं के निर्यात में 9.75% की मजबूत वृद्धि।
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इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और कृषि-आधारित वस्तुओं का योगदान।
जीएसटी 2.0
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सरल दो-स्लैब संरचना (5% और 18%)।
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अक्टूबर 2025 में जीएसटी संग्रह ₹1.96 लाख करोड़, 4.6% की वृद्धि।
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खपत और कर अनुपालन में सुधार।
विकास अनुमान
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आरबीआई ने 2025–26 का अनुमान 6.8% किया।
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विश्व बैंक, IMF, OECD और S&P ने भारत के लिए 6–7% के बीच वृद्धि अनुमान दिए।
यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।