क्या है उपलब्धि
भारत में विकसित Supernova Stent Retriever को केवल घरेलू क्लिनिकल ट्रायल डेटा के आधार पर निर्माण और विपणन की मंज़ूरी मिल गई है। यह डिवाइस गंभीर स्ट्रोक के मामलों में मस्तिष्क की अवरुद्ध रक्त नलिकाओं से थक्का निकालकर 24 घंटे के भीतर रक्त प्रवाह बहाल करने में उपयोगी है। इसका व्यावसायिक लॉन्च फरवरी 2026 में प्रस्तावित है।
विकास और नियामक स्वीकृति
इस डिवाइस का विकास Gravity Medical Technology ने किया है। क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व AIIMS दिल्ली ने किया, जो GRASSROOT ट्रायल का राष्ट्रीय समन्वय केंद्र भी रहा।
Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने सुरक्षा और प्रभावशीलता के सकारात्मक परिणामों के आधार पर इसे मंज़ूरी दी। यह पहली बार है जब किसी स्ट्रोक डिवाइस को भारत में केवल घरेलू ट्रायल डेटा पर स्वीकृति मिली है।
ट्रायल के प्रमुख निष्कर्ष
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यह भारत का पहला prospective multicentre thrombectomy trial था।
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सफल रक्त प्रवाह बहाली की उच्च दर दर्ज की गई।
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ब्रेन ब्लीड: 3.1%
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मृत्यु दर: 9.4%
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90 दिनों में 50% रोगियों में कार्यात्मक स्वतंत्रता
इन निष्कर्षों को Journal of Neurointerventional Surgery (JNIS) में प्रकाशित किया गया है।
भारत के लिए महत्व
डिवाइस पहले ही दक्षिण-पूर्व एशिया में 300 से अधिक रोगियों में उपयोग हो चुकी है। अब भारत में इसका निर्माण होने से यह किफ़ायती कीमत पर उपलब्ध होगी। यह हर वर्ष स्ट्रोक से प्रभावित लगभग 17 लाख भारतीयों के लिए उपचार की बेहतर पहुंच सुनिश्चित कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय
AIIMS दिल्ली के अनुसार, यह ट्रायल भारत में स्ट्रोक उपचार के लिए एक निर्णायक मोड़ है। वहीं, डेवलपर्स का कहना है कि यह डिवाइस भारत की उस प्रोफ़ाइल के अनुरूप है जहाँ स्ट्रोक अपेक्षाकृत कम उम्र में होते हैं।
यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।