भारतीय रेल के अंतर्गत रेल मंत्रालय ने स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली – कवच 4.0 को कुल 472.3 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक कमीशन किया है। यह एक ही दिन और एक ही महीने में अब तक का सबसे बड़ा कवच कमीशनिंग रिकॉर्ड है। इस कदम से यात्रियों की सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित व विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। कवच प्रणाली का उद्देश्य सिग्नल डेंजर पर ट्रेन के आगे बढ़ने (SPAD), आमने-सामने तथा पीछे से होने वाली टक्करों और ओवर-स्पीडिंग जैसी दुर्घटनाओं को रोकना है।
नए कमीशन किए गए मार्गों में पश्चिम रेलवे का वडोदरा–विरार खंड (344 किमी), उत्तर रेलवे का तुगलकाबाद जंक्शन केबिन–पलवल खंड (35 किमी) और पूर्व मध्य रेलवे का मानपुर–सरमटनर खंड (93.3 किमी) शामिल हैं। वडोदरा–विरार खंड में 28 स्टेशन और 28 ब्लॉक सेक्शन आते हैं, जहाँ S-Kavach यूनिट, रेडियो इंटरफेस यूनिट, ऊँचे टावर और सैकड़ों किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है। तुगलकाबाद–पलवल खंड दिल्ली क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण चार-लाइन कॉरिडोर है, जहाँ स्वचालित और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग दोनों प्रणालियों पर कवच लागू किया गया है। वहीं मानपुर–सरमटनर खंड दिल्ली–हावड़ा के अत्यंत व्यस्त रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जहाँ मालगाड़ी, मेल/एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों का मिश्रित संचालन होता है।
कवच 4.0 प्रणाली ट्रेन की गति पर लगातार निगरानी रखती है और खतरे की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटनाओं को रोकती है। यह कम दृश्यता और प्रतिकूल मौसम में भी प्रभावी ढंग से कार्य करती है तथा SIL-4 जैसे वैश्विक उच्चतम सुरक्षा मानक का पालन करती है। पूरी तरह स्वदेशी और लागत-प्रभावी होने के कारण कवच 4.0 न केवल आयात पर निर्भरता कम करता है, बल्कि भारतीय रेल सिग्नलिंग उद्योग को भी मजबूती प्रदान करता है।
कवच 4.0 परियोजना: मुख्य मार्ग
वडोदरा–विरार खंड (पश्चिम रेलवे)
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लंबाई: 344 किमी
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विरार–सूरत सेक्शन
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28 स्टेशन, 28 ब्लॉक सेक्शन
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33 S-Kavach यूनिट
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64 रेडियो इंटरफेस यूनिट (RIU)
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40 मीटर ऊँचे 33 टावर
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412 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल (ड्यूल पाथ)
तुगलकाबाद जंक्शन केबिन–पलवल (उत्तर रेलवे)
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लंबाई: 35 किमी
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दिल्ली क्षेत्र का चार-लाइन कॉरिडोर
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कुल 152 ट्रैक किमी
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ऑटोमैटिक सिग्नलिंग + एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग
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सभी मुख्य लाइनों पर कवच प्रणाली लागू
मानपुर–सरमटनर खंड (पूर्व मध्य रेलवे)
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लंबाई: 93.3 किमी
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दिल्ली–हावड़ा सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर का हिस्सा
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राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड
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77 स्टेशन (8 जंक्शन)
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79 लेवल क्रॉसिंग गेट
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7 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल
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मालगाड़ी, मेल/एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनें संचालित
कवच 4.0 कैसे काम करता है? (कार्यप्रणाली)
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सिग्नल डेंजर पर पार (SPAD) होने से रोकता है
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हेड-ऑन और रियर-एंड टक्कर से सुरक्षा
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ओवर-स्पीडिंग पर स्वतः ब्रेक लगाता है
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कम दृश्यता और खराब मौसम में भी प्रभावी
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SIL-4 सुरक्षा मानक (दुनिया का सर्वोच्च सुरक्षा स्तर) के अनुरूप
कवच 4.0 का महत्व
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पूर्णतः स्वदेशी तकनीक
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आयात पर निर्भरता कम
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भारतीय सिग्नलिंग उद्योग को बढ़ावा
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लागत-प्रभावी और उच्च सुरक्षा