समारोह का आयोजन एवं प्रमुख उपस्थितियां
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2023 और 2024 के लिए शिल्प गुरु पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर देशभर के कारीगरों, डिजाइनरों, हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े नवप्रवर्तकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पुरस्कारों की संख्या एवं श्रेणियां
इस वर्ष कुल 48 पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें 12 शिल्प गुरु पुरस्कार तथा 36 राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार शामिल थे। राष्ट्रीय पुरस्कारों में दो डिजाइन एवं नवाचार पुरस्कार भी सम्मिलित थे, जो कारीगरों और डिजाइनरों के सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिए गए। पुरस्कार विजेताओं में 20 महिला कारीगर शामिल रहीं, जो हस्तशिल्प क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
हस्तशिल्प की विविधता का प्रतिनिधित्व
सम्मानित कारीगरों ने लकड़ी और धातु शिल्प, मिट्टी एवं टेराकोटा कला, जूट एवं बांस शिल्प, पट्टचित्र, हस्तमुद्रित वस्त्र, पत्थर नक्काशी, कालीन निर्माण, कठपुतली निर्माण, खिलौने तथा कागज लुगदी शिल्प जैसे विविध पारंपरिक एवं कलात्मक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। यह विविधता भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल की व्यापकता को प्रदर्शित करती है।
राष्ट्रपति का संबोधन एवं हस्तशिल्प का महत्व
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय कारीगर देश की सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं, जिन्होंने पीढ़ियों से पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करते हुए आधुनिक तकनीक और बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है। उन्होंने हस्तशिल्प क्षेत्र को ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तीकरण और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया तथा युवाओं को इस क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और निवेश के माध्यम से नए अवसरों का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।
सरकार की नीतियां एवं क्षेत्र को प्रोत्साहन
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने हस्तशिल्प क्षेत्र को देश में रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए प्राकृतिक रेशों जैसे जूट और जलकुंभी के उपयोग को बढ़ावा देने तथा उत्पाद विविधीकरण पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के माध्यम से कारीगरों और उद्यमियों को सहयोग प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि हस्तशिल्प केवल उत्पाद नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्मृतियों की अभिव्यक्ति है, जो स्थानीय स्तर से लेकर वैश्विक बाजार तक भारतीय रचनात्मकता को प्रदर्शित करता है।
यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।