फिल्ममेकर और उपलब्धि
मुंबई की फिल्ममेकर Mayurica Biswas को उनकी डॉक्यू-सीरीज़ The Resurrection Quest के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है। यह सीरीज़ 16वें कान्स कॉरपोरेट मीडिया एंड टीवी अवॉर्ड्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार श्रेणी में गोल्ड डॉल्फिन अवॉर्ड से सम्मानित की गई।
डॉक्यू-सीरीज़ की पृष्ठभूमि
The Resurrection Quest उत्तरी श्वेत गैंडे के अस्तित्व संकट पर केंद्रित है, जिसकी केवल दो मादा जीवित बची हैं। दशकों से जारी अवैध शिकार ने इस प्रजाति को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया है। इस संकट के बीच विज्ञान किस प्रकार हस्तक्षेप कर रहा है, यही इस डॉक्यू-सीरीज़ का मूल विषय है।
विज्ञान और विलुप्ति के बीच संघर्ष
डॉक्यू-सीरीज़ में विलुप्ति रोकने और ‘डी-एक्सटिंक्शन’ के प्रयासों को दर्शाया गया है। इसमें केन्या में गैंडे का IVF, साइबेरिया में ऊनी मैमथ के डीएनए पर शोध, दुबई में ऊंट क्लोनिंग और चीन में पालतू जानवरों की क्लोनिंग प्रयोगशालाओं को दिखाया गया है। आठ देशों में फिल्माए गए फुटेज के माध्यम से यह सीरीज़ दिखाती है कि वैज्ञानिक क्लोनिंग, जीन-एडिटिंग और सहायक प्रजनन तकनीकों से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
भावनात्मक पक्ष और मानवीय कहानियां
यह डॉक्यू-सीरीज़ केवल वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को भी सामने लाती है। इसमें एक जीवविज्ञानी का विलुप्त पक्षी को पुनर्जीवित करने का सपना, पिघलते पर्माफ्रॉस्ट के खिलाफ समय से लड़ता पिता-पुत्र, और अपने पालतू जानवर को खोने के दर्द से जूझता एक पशु चिकित्सक शामिल हैं।
नैतिक प्रश्न और विमर्श
The Resurrection Quest डी-एक्सटिंक्शन से जुड़े नैतिक सवालों को भी उठाती है। क्या यह नवाचार है, मजबूरी है या मानवीय अहंकार? निर्देशक मायूरिका बिस्वास के अनुसार, यह सीरीज़ आसान उत्तर नहीं देती, बल्कि अनिश्चितता, विरोधाभास और विस्मय के लिए स्थान छोड़ती है। यह उस दुनिया को दर्शाती है जहां इंसान जीन संपादित कर सकता है, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने में असफल रहा है।
निर्माण टीम और सहयोग
इस परियोजना का निर्माण स्टोरीटेलर फिल्म्स द्वारा सिंगापुर के CNA चैनल के लिए किया गया। भारतीय क्रू में क्रिएटिव डायरेक्टर राधिका चंद्रशेखर, सीरीज़ एडिटर तुषार घोगले और सिनेमैटोग्राफर कार्तिक थपलियाल शामिल रहे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय रचनात्मकता
कान्स में मिला यह सम्मान भारतीय डॉक्यूमेंट्री सिनेमा और विज्ञान-आधारित कहानी कहने की क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करता है, साथ ही संरक्षण, विज्ञान और नैतिकता पर गंभीर विमर्श को भी बढ़ावा देता है।
यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।