करीब दो दशकों की लंबी बातचीत और कई उतार–चढ़ावों के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत आखिरकार औपचारिक रूप से पूरी हो गई है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि दिल्ली में आयोजित भारत-EU शिखर सम्मेलन से पहले सामने आई है और इसे भारत के वैश्विक व्यापार कूटनीति के लिहाज से एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह डील देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई गति देगी और साथ ही सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों—जैसे आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम—का भी विस्तार करेगी। प्रधानमंत्री ने गोवा में इंडिया एनर्जी वीक का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए इस FTA को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया और कहा कि इससे वैश्विक निवेशकों और कारोबारियों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा।
इस व्यापार समझौते के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक अहम मोबिलिटी समझौता भी किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय छात्रों, कुशल कामगारों और पेशेवरों के लिए EU के 27 सदस्य देशों में पढ़ाई और काम के अवसरों को आसान बनाना है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अमेरिका भारतीय नागरिकों के लिए H-1B और अन्य वीज़ा मार्गों को महंगा और सख्त बना रहा है। ऐसे में यूरोप भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर सकता है।
व्यापार के नजरिए से देखें तो इस FTA से भारत के कई श्रम-प्रधान और निर्यातोन्मुखी सेक्टरों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, और जूट उद्योग को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी इजाफा होगा।
दोनों पक्षों द्वारा इस समझौते पर बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा भारत-EU शिखर सम्मेलन में की जाएगी। हालांकि, समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर कुछ समय बाद होंगे, क्योंकि इससे पहले इसके कानूनी पहलुओं की गहन जांच (लीगल स्क्रबिंग) की जाएगी। कुल मिलाकर, यह FTA भारत-EU संबंधों को एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति और वैश्विक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
Source: Indian Express