पिछले लगभग ढाई वर्षों में भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर उतार–चढ़ाव देखने को मिला। वर्ष 2023 में उत्पन्न कूटनीतिक संकट के बाद दोनों देशों के रिश्ते अभूतपूर्व तनाव के दौर से गुज़रे। हालांकि 2025 के बाद नेतृत्व परिवर्तन, रणनीतिक संवाद और वैश्विक परिस्थितियों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य दिशा में लाने का मार्ग प्रशस्त किया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा को इसी बहाली प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
2023 का कूटनीतिक संकट: निज्जर प्रकरण
सितंबर 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में यह आरोप लगाया कि खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संभावित भूमिका हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा उन्होंने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी उठाया था। भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेतुका और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया। यहीं से दोनों देशों के संबंधों में तीव्र गिरावट शुरू हुई।
भारत–कनाडा संबंधों पर तत्काल प्रभाव
इन आरोपों के बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संबंध तेजी से बिगड़े। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया, वाणिज्य दूतावास बंद हुए और उच्चायुक्तों को वापस बुला लिया गया। इस प्रकार के कदम सामान्यतः युद्ध या गंभीर सुरक्षा संकट की स्थिति में उठाए जाते हैं। भारत ने कनाडा को आतंकवादियों और चरमपंथियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह कहकर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
2025 के बाद संबंध सुधार की शुरुआत
जनवरी 2025 में जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने की घोषणा और मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही संबंधों में सुधार की संभावनाएँ बनीं। कार्नी ने निज्जर मामले को राजनीतिक मुद्दे के बजाय कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय मानते हुए, इसे आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों से अलग रखने का दृष्टिकोण अपनाया। यह बदलाव भारत–कनाडा संबंधों के लिए निर्णायक साबित हुआ।
उच्चस्तरीय संवाद और विश्वास बहाली
जून 2025 में कनाडा में आयोजित G7 आउटरीच शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया। इस बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संबंधों में स्थिरता लाने के लिए “कैलिब्रेटेड और रचनात्मक कदम” उठाने पर सहमति जताई। इसके परिणामस्वरूप उच्चायुक्तों की वापसी, वीज़ा प्रतिबंधों में ढील और विदेश मंत्री तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर पारस्परिक यात्राएँ फिर से शुरू हुईं।
सुरक्षा सहयोग और ‘फायरवॉल’ रणनीति
निज्जर जांच के प्रभाव को सीमित रखने के लिए भारत और कनाडा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर ‘ट्रांसनेशनल क्राइम’ से निपटने के लिए एक अलग तंत्र स्थापित किया। इसका उद्देश्य कनाडा में प्रो-खालिस्तानी गतिविधियों से जुड़ी भारतीय चिंताओं पर संवाद बनाए रखना है, ताकि समग्र द्विपक्षीय संबंध प्रभावित न हों।
व्यापार और आर्थिक संबंध
भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 30.8 अरब डॉलर रहा। भारत कनाडा को दवाइयाँ, मशीनरी, लोहा–इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वस्त्र और समुद्री उत्पाद निर्यात करता है, जबकि कनाडा से भारत को दालें, पोटाश उर्वरक और खनिज आयात होते हैं। कनाडा भारत में 17वाँ सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है।
सुरक्षा और रक्षा सहयोग
दोनों देशों के बीच आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर लंबे समय से संवाद चलता आ रहा है। 1997 में संयुक्त कार्य समूह ऑन काउंटर टेररिज्म की स्थापना हुई थी, जबकि 2018 में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद से निपटने के लिए अलग समझौता किया गया। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की यात्राओं ने इस सहयोग को पुनर्जीवित किया है।
ऊर्जा सहयोग
कनाडा के पास तेल, गैस, LNG, LPG और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं, जबकि भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। इसी कारण ऊर्जा सहयोग भारत–कनाडा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी भविष्य में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं।
शिक्षा और मानव संसाधन
शिक्षा क्षेत्र ने भारत और कनाडा के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत किया है। कनाडा में भारतीय छात्र सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह हैं। दिसंबर 2024 तक लगभग 3.92 लाख भारतीय छात्र कनाडा में अध्ययन कर रहे थे। दोनों देशों के बीच संस्थागत साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और अकादमिक मोबिलिटी को रणनीतिक महत्व दिया गया है।
प्रवासी भारतीय और खालिस्तान मुद्दा
कनाडा में लगभग 18 लाख इंडो-कनाडियन रहते हैं, जो राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि सिख समुदाय के भीतर खालिस्तानी समर्थक एक छोटा लेकिन संगठित समूह है, जिसने अतीत में द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया। यह मुद्दा भारत–कनाडा संबंधों में संवेदनशील बना हुआ है।
भू-राजनीतिक संदर्भ
कनाडा G7 समूह और ‘फाइव आइज़’ खुफिया गठबंधन का सदस्य है, जबकि ये सभी देश भारत के भी प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं। हाल के वर्षों में भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रौद्योगिकी और नवाचार पर त्रिपक्षीय साझेदारी भी बनी है। वैश्विक व्यापार और सुरक्षा परिदृश्य में हो रहे बदलावों के बीच भारत–कनाडा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है।