भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए थल, वायु, समुद्री और रक्षा औद्योगिक क्षेत्रों में विस्तारित सहयोग ढांचे पर सहमति जताई है। यह प्रगति भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी को रणनीतिक रूप से और गहरा करती है।
पहली भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता
यह घोषणाएं कैनबरा में आयोजित पहली भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता के बाद की गईं। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री Richard Marles और भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने की।
रणनीतिक अभिसरण और साझा दृष्टिकोण
ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि इस संवाद ने दोनों इंडो-पैसिफिक लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक अभिसरण को रेखांकित किया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझा दृष्टिकोण को दोहराया।
पनडुब्बी बचाव सहयोग में ऐतिहासिक प्रगति
बैठक के दौरान पारस्परिक पनडुब्बी बचाव सहायता और सहयोग से संबंधित कार्यान्वयन व्यवस्था (Implementing Arrangement on Mutual Submarine Rescue Support and Cooperation) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया। इसे समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया। साथ ही 2024 में हस्ताक्षरित एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग समझौते के क्रियान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पाँच वर्ष
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह दो दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। बैठक में हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग में हुई तीव्र प्रगति को रेखांकित किया गया।
तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सूचना साझा करने से संबंधित समझौता, पनडुब्बी खोज और बचाव सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन, तथा संयुक्त स्टाफ वार्ता स्थापित करने के लिए संदर्भ शर्तें शामिल हैं।
संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप
दोनों पक्षों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप पर भी चर्चा की, जिसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र जागरूकता और परिचालन अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है। ऑस्ट्रेलिया ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका की सराहना की।
सैन्य अभ्यासों में सहभागिता
ऑस्ट्रेलिया ने पनडुब्बी बचाव अभ्यास ‘ब्लैक कैरिलन’ में भारत को आमंत्रित किया। भारत ने बदले में ‘टैलिसमैन सेबर’, ‘ऑस्ट्राहिंद’ और ‘पुक पुक’ जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में ऑस्ट्रेलिया की निरंतर भागीदारी का स्वागत किया।
रक्षा औद्योगिक सहयोग और उभरती तकनीकें
रक्षा औद्योगिक सहयोग के महत्व को स्वीकार करते हुए मंत्रियों ने ऑस्ट्रेलिया के पहले रक्षा व्यापार मिशन (7–10 अक्टूबर 2025) की घोषणा की और सिडनी में आगामी भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग गोलमेज सम्मेलन की पुष्टि की। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित प्रणालियों और सुरक्षित संचार जैसी उभरती तकनीकों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
नौसैनिक सहयोग और शिपयार्ड सुविधा
ऑस्ट्रेलिया ने रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के जहाजों के लिए भारतीय शिपयार्डों में रखरखाव और मरम्मत सुविधाएं प्रदान करने के भारत के प्रस्ताव के लिए आभार व्यक्त किया। इसे व्यावहारिक रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना गया।
शिक्षा और कार्मिक आदान-प्रदान
दोनों देशों ने रक्षा शिक्षा और कार्मिक आदान-प्रदान को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। इसके तहत 2026 में और अधिक भारतीय छात्रों को ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में प्रवेश दिया जाएगा तथा 2027 में ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स अकादमी में एक स्थान भारतीय छात्रों के लिए खोला जाएगा।
इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों ने नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS), के पालन पर जोर दिया।
बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
दोनों पक्षों ने ऑस्ट्रेलिया–भारत–इंडोनेशिया त्रिपक्षीय व्यवस्था और क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।
आगामी संवाद
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए 2026 में होने वाले अगले वार्षिक भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद के लिए भारत आने पर सहमति जताई।