भारत और इज़राइल के बीच कृषि सहयोग को एक नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने उन्नत कृषि तकनीकों के विकास के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और तकनीक-आधारित बनाना है। यह सहयोग ऐसे समय में सामने आया है जब जलवायु परिवर्तन, जल संकट और किसानों की आय बढ़ाने की चुनौती भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत–इज़राइल नवाचार केंद्र (IINCA) की स्थापना
भारत और इज़राइल ने भारत में India–Israel Innovation Centre for Agriculture (IINCA) की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद Indian Council of Agricultural Research (ICAR) में स्थापित किया जाएगा। इज़राइल की अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी MASHAV इस पहल में प्रमुख साझेदार है। इस केंद्र का उद्देश्य प्रिसीजन फार्मिंग, सैटेलाइट-आधारित सिंचाई, उन्नत कृषि मशीनरी और एकीकृत कीट प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का विकास करना है।
समझौते की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
यह समझौता प्रधानमंत्री Narendra Modi की इज़राइल यात्रा (25–26 फरवरी) के दौरान किया गया। इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह नवाचार केंद्र भविष्य के लिए तैयार कृषि समाधान विकसित करने की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत–इज़राइल कृषि सहयोग का इतिहास लंबा और सफल रहा है, जिसे अब एक “फ्यूचरिस्टिक” दिशा दी जा रही है।
नवाचार केंद्र की प्रमुख भूमिकाएँ
IINCA का फोकस कृषि नवाचार के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर होगा। इसमें नागरिक उपयोग के ड्रोन, सैटेलाइट आधारित पूर्वानुमान डेटा के माध्यम से सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण, एकीकृत कीट एवं रोग नियंत्रण, नेमाटोड प्रबंधन और मधुमक्खी पालन शामिल हैं। यह केंद्र बागवानी फसलों के लिए पौध जर्मप्लाज्म प्रबंधन और आदान–प्रदान में भी भूमिका निभाएगा।
क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास
नवाचार केंद्र ICAR से संबद्ध उच्च शिक्षण संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), शिक्षकों और छात्रों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाएगा। भारत और इज़राइल दोनों देशों में प्रशिक्षण और ज्ञान साझा करने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, कटाई के बाद प्रबंधन (post-harvest management) और बागवानी फसलों में यंत्रीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ से ‘विलेजेज ऑफ एक्सीलेंस’ तक
IINCA की घोषणा से पहले ही भारत और इज़राइल मिलकर फलों और सब्जियों के लिए ‘Centres of Excellence’ कार्यक्रम चला रहे हैं। अब तक 35 ऐसे केंद्र स्थापित हो चुके हैं और भारत ने इनकी संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा है। इस सफलता से प्रेरित होकर अब ‘Villages of Excellence’ की अवधारणा पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत इज़राइली तकनीक को सीधे भारतीय गांवों तक पहुँचाकर किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
संयुक्त कृषि अनुसंधान फेलोशिप
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान के लिए 20 संयुक्त फेलोशिप शुरू करने की भी घोषणा की। इसके तहत भारतीय शोधकर्ताओं को इज़राइल के Volcani Agriculture Research Organization में काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्नत अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का लाभ भारतीय कृषि को मिलेगा।
मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में सहयोग
कृषि के अलावा भारत और इज़राइल ने मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य टिकाऊ और तकनीक-आधारित मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसमें उन्नत उत्पादन प्रणालियाँ, रोग प्रबंधन, मैरिकल्चर (समुद्री कृषि) और सीवीड (समुद्री शैवाल) की खेती शामिल है। सहयोग का दायरा अनुसंधान एवं विकास, व्यापार, प्रशिक्षण, नवाचार और ‘Centres of Excellence’ की स्थापना तक फैला हुआ है।