बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में 8 बाघों की मौत पर मध्य प्रदेश सरकार की स्थिति रिपोर्ट

नवंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 के बीच बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में कुल 8 बाघों की मौत दर्ज की गई। इस संबंध में वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि किसी भी मामले में शिकार (पोचिंग) के प्रमाण नहीं मिले हैं।

मौतों का वर्गीकरण

  • कुल 8 मौतों में से 4 बाघों की मौत करंट लगने (इलेक्ट्रोक्यूशन) से हुई।4 बाघों की मौत प्राकृतिक जैविक और पारिस्थितिक कारणों से हुई।

करंट से हुई मौतों का विवरण

  • 4 इलेक्ट्रोक्यूशन मामलों में 3 बाघों की मौत रिज़र्व से सटे कृषि क्षेत्रों में बिछाई गई अवैध लाइव बिजली तारों के संपर्क में आने से हुई।1 बाघ की मौत सौर ऊर्जा से संचालित इलेक्ट्रिक फेंसिंग में उलझने से हुई।

  • रिपोर्ट के अनुसार, बाघों का प्राकृतिक फैलाव व्यवहार उन्हें संरक्षित क्षेत्र से बाहर खेतों और राजस्व भूमि की ओर ले जाता है।

अवैध बिजली तारों की समस्या

  • किसानों द्वारा फसलों को शाकाहारी जानवरों से बचाने के लिए चोरी-छिपे खुले खेतों में अवैध लाइव तार बिछाए जाते हैं। कई बार ये तार सीधे ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनों से जोड़े जाते हैं।

  • ऐसे अवैध तारों के संपर्क में आने से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की करंट लगने से मौत हो जाती है।रिपोर्ट में इसे राजस्व क्षेत्रों में एक बार-बार सामने आने वाला जोखिम बताया गया है।

जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई

  • राज्य सरकार के अनुसार हर इलेक्ट्रोक्यूशन मामले में त्वरित फील्ड रिस्पॉन्स किया गया। मौके का निरीक्षण और सत्यापन हुआ।वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए।जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।आगे की विधिक प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी है।

प्राकृतिक कारणों से हुई मौतें

  • शेष 4 बाघों की मौत बीमारियों, आपसी क्षेत्रीय संघर्ष, डूबने जैसी घटनाओं एवं अन्य प्राकृतिक पारिस्थितिक कारणों से हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि ये कारण वन्यजीव आबादी में स्वाभाविक और अपरिहार्य होते हैं। इन्हें लापरवाही या शिकार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

रिज़र्व प्रबंधन पर सरकार का पक्ष

  • रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन की ओर से कोई प्रणालीगत लापरवाही के प्रमाण नहीं हैं। सभी मौतों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई।

सुधारात्मक और निवारक कदम

  • बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर ने बिजली विभाग को औपचारिक पत्र लिखा।

  • पत्र में चेतावनी दी गई कि संरक्षित क्षेत्रों और आसपास की जर्जर बिजली लाइनें बाघों व हाथियों सहित वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा हैं।

  • 27 जनवरी 2026 के पत्र में ताला, मगधी, खितौली, पनपथा, धमोखर और आसपास के वन्यजीव गलियारे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया

  • इन क्षेत्रों में 11 केवी और लो-टेंशन लाइनों की हालत अत्यंत खराब बताई गई।

सुझाए गए तकनीकी उपाय

  • सभी संरक्षित क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों में बिजली लाइनों का तकनीकी ऑडिट।

  • झुकी हुई लाइनों को सही टेंशन देकर मजबूत करना।

  • हाथी आवागमन क्षेत्रों में खुले तारों की जगह इंसुलेटेड एरियल बंच्ड केबल लगाना।

  • बिजली के खंभों पर स्पाइक गार्ड लगाना ताकि वन्यजीवों से नुकसान न हो।

  • बिना उचित खंभों के लंबी दूरी की अस्थायी बिजली आपूर्ति को गंभीर उल्लंघन बताया गया।

जनहित याचिका में लगाए गए आरोप

  • याचिका में कहा गया कि 2025 में 54 बाघों की मौत हुई। 2026 की शुरुआत में ही मौतों में वृद्धि देखी गई।

  • इसे लापरवाही, कमजोर निगरानी और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों का परिणाम बताया गया।

उच्च न्यायालय की भूमिका

  • उच्च न्यायालय ने बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए। प्रत्येक बाघ मृत्यु का कारण और की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

राज्य स्तर पर चिंता का विषय

  • 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज हुई।

  • यह संख्या 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद राज्य में एक वर्ष में सबसे अधिक मानी गई।