प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा का निधन

निधन की सूचना

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक और पद्म विभूषण से सम्मानित Chhannulal Mishra का 2 अक्टूबर 2025 को निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे मिश्रा ने तड़के लगभग 4 बजे अंतिम सांस ली। वे कुछ समय से मिर्ज़ापुर में अपनी सबसे छोटी बेटी के परिवार के साथ रह रहे थे।

स्वास्थ्य और अंतिम समय

उनकी तबीयत 1 अक्टूबर की रात अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनकी पुत्री नम्रता मिश्रा ने बताया कि वे पिछले 17–18 दिनों से आयु-सम्बंधी समस्याओं के कारण इलाजरत थे।

अंतिम संस्कार

पंडित छन्नूलाल मिश्रा का अंतिम संस्कार 2 अक्टूबर को शाम 5 बजे Varanasi में किया जाएगा। वे अपने पीछे तीन बेटियां और एक पुत्र छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी और एक बेटी का निधन चार वर्ष पूर्व हो चुका है।

प्रधानमंत्री की संवेदना

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि उन्हें पंडित छन्नूलाल मिश्रा का स्नेह और आशीर्वाद मिला। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2014 में वाराणसी लोकसभा सीट से उनके नामांकन प्रस्तावकों में पंडित मिश्रा भी शामिल थे।

संगीत साधना और योगदान

1936 में आज़मगढ़ में जन्मे पंडित छन्नूलाल मिश्रा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के शीर्षस्थ कलाकारों में गिने जाते थे। उन्होंने ख़याल, ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी और भजन जैसी शैलियों में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे बनारस घराने और पूरब अंग की ठुमरी के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे।

गुरु और प्रशिक्षण

पंडित मिश्रा को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्रा से मिली। इसके अलावा उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल ग़नी ख़ान और ठाकुर जयदेव सिंह से भी संगीत प्रशिक्षण प्राप्त किया।

सम्मान और उपलब्धियां

उनकी कला साधना के लिए उन्हें 2010 में पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा के ऐसे स्तंभ थे, जिन्होंने बनारस की संगीत संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई।

भारतीय संगीत जगत की अपूरणीय क्षति

पंडित छन्नूलाल मिश्रा का निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी गायकी, साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।