प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2025 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित ज्योतिसर में नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस (Shaheedi Diwas) के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट, ₹350 का विशेष स्मृति सिक्का तथा एक कॉफी-टेबल बुक का लोकार्पण किया। यह आयोजन गुरु तेग बहादुर के उस सर्वोच्च बलिदान को समर्पित था, जो उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और अंतरात्मा की आज़ादी की रक्षा के लिए दिया। इतिहास में “हिंद दी चादर” के रूप में प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर ने मुगल शासन के दौरान जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़े होकर अपने प्राण न्योछावर किए, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में धार्मिक सहिष्णुता और मानव गरिमा के मूल्यों को स्थायी बल मिला।
यह कार्यक्रम ज्योतिसर में आयोजित हुआ, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और पुस्तक का विमोचन देशव्यापी, वर्ष-पर्यंत चलने वाले 350वें शहादत दिवस समारोहों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गुरु तेग बहादुर के विचारों और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुरु तेग बहादुर के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रेत-कला (Sand Art) को देखा तथा 350 बच्चों द्वारा किए गए कीर्तन में भी सहभागिता की—जो शहादत की 350वीं वर्षगांठ का प्रतीकात्मक स्मरण था।
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने पंचजन्य स्मारक का उद्घाटन भी किया और महाभारत अनुभव केंद्र (Mahabharata Experience Centre) का भ्रमण किया, जिससे भारत की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रचार पर बल मिला। समग्र रूप से यह आयोजन गुरु तेग बहादुर के जीवन को धर्मनिष्ठा, साहस, त्याग और मानवाधिकारों की रक्षा के शाश्वत आदर्शों के रूप में रेखांकित करता है तथा समकालीन भारत के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में उनकी प्रासंगिकता को पुनः स्थापित करता है।