गंगा बेसिन में रेत के टीलों पर घोंसला बनाने वाले पक्षी

संदर्भ

भारत सरकार ने गंगा बेसिन में रेतीले टीलों पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों के प्रजनन आवासों की रक्षा हेतु पहली समर्पित संरक्षण परियोजना को मंजूरी दी है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की 68वीं कार्यकारी समिति की बैठक में लिया गया।

परियोजना का उद्देश्य

  • रेतीले टीलों और द्वीपों पर घोंसला बनाने वाली लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन आवासों का संरक्षण

  • दीर्घकालिक निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और साक्ष्य-आधारित संरक्षण

  • संवेदनशील घोंसला स्थलों पर मानवीय हस्तक्षेप में कमी

  • नदी-आधारित जैव विविधता में वृद्धि

लक्षित प्रजातियाँ

  • मुख्य लक्ष्य: इंडियन स्किमर

  • अन्य प्रजातियाँ: ब्लैक-बेलीड टर्न, रिवर टर्न, रिवर लैपविंग, ग्रेट थिक-नी

परियोजना क्षेत्र

  • मौजूदा निगरानी: चंबल नदी और गंगा के निचले हिस्से

  • नई निगरानी शुरुआत: बिजनौर, नरौरा और प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

रेत के टीलों पर घोंसला बनाने वाले पक्षी: विशेषताएँ

  • कम जल स्तर के मौसम में नदी के भीतर बने खुले रेतीले टीलों पर प्रजनन

  • कृत्रिम घोंसला नहीं; अंडे सीधे रेत पर

  • कम वनस्पति वाले घुमावदार नदी क्षेत्रों को प्राथमिकता

  • भारत में प्रमुख नदियाँ: गंगा, यमुना, चंबल, ब्रह्मपुत्र

इंडियन स्किमर: संक्षिप्त प्रोफ़ाइल

  • पहचान: चमकीली नारंगी चोंच; उड़ते हुए जल-सतह से मछलियाँ पकड़ना

  • प्रजनन: मार्च–मई, रेतीले टीलों पर—व्यवधान के प्रति संवेदनशील

  • संरक्षण स्थिति: लुप्तप्राय (IUCN)

  • संकेतक प्रजाति: स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी का जैव-संकेत

स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (NMCG): भूमिका

  • नमामि गंगा का कार्यान्वयन प्राधिकरण

  • लक्ष्य: प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिकी पुनरुद्धार, अविरल-निर्मल धारा

  • संरचना: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में शासी परिषद; महानिदेशक-स्तरीय कार्यकारी समिति

यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।