डिजिटल लत पर चिंता
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 ने बच्चों और किशोरों में बढ़ती डिजिटल लत (Digital Addiction) को गंभीर सामाजिक समस्या बताया है। सर्वे के अनुसार कम उम्र के उपयोगकर्ता सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने, हानिकारक कंटेंट देखने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
आयु-आधारित प्रतिबंध का सुझाव
सर्वेक्षण ने सरकार से सिफारिश की है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर आयु-आधारित सीमाएँ लागू करने पर विचार किया जाए। हालांकि, सर्वेक्षण ने पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) की वकालत नहीं की है।
बड़ी टेक कंपनियों पर असर
यदि भारत सरकार इस सिफारिश को लागू करती है, तो इसका सीधा प्रभाव Meta, Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि भारत इन कंपनियों का दुनिया का सबसे बड़ा यूज़र बेस वाला बाजार है।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण — ऑस्ट्रेलिया
सर्वेक्षण में विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण दिया गया है, जहाँ 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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ऑस्ट्रेलिया इस तरह का कानून लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बना है।
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Instagram, YouTube और Snap जैसे प्लेटफॉर्म्स को 16 वर्ष से कम उम्र के लाखों अकाउंट्स ब्लॉक करने पड़े।
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भारतीय राज्यों की पहल
भारत में भी कुछ राज्य इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
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आंध्र प्रदेश और गोवा बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
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भारत का डेटा संरक्षण ढांचा (Data Protection Framework)
भारत के डेटा संरक्षण कानून के तहत:
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18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सेवाएँ देने के लिए कंपनियों को माता-पिता की सहमति लेनी होगी।
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बच्चों के लिए व्यवहार-आधारित ट्रैकिंग (Behavioural Tracking) और लक्षित विज्ञापन (Targeted Advertising) पर रोक लगाई गई है।
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यह ढांचा अधिसूचित हो चुका है, लेकिन अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
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प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी तय करने पर जोर
सर्वेक्षण में कहा गया है कि:
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आयु सत्यापन (Age Verification) की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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बच्चों के लिए आयु-उपयुक्त डिफॉल्ट सेटिंग्स लागू की जानी चाहिए।
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विशेष रूप से सोशल मीडिया, जुआ ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टार्गेटेड विज्ञापनों पर सख्त निगरानी होनी चाहिए।
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सरल डिजिटल उपकरणों को बढ़ावा
सर्वेक्षण ने सुझाव दिया है कि बच्चों के लिए:
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बेसिक फोन या केवल शिक्षा-उद्देश्य वाले टैबलेट को प्रोत्साहित किया जाए।
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स्क्रीन टाइम लिमिट और कंटेंट फिल्टर अनिवार्य किए जाएँ।
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इससे बच्चों को हिंसक, यौन या जुए से जुड़े कंटेंट से बचाया जा सकेगा।
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ऑस्ट्रेलिया का नया कानून — मुख्य प्रावधान
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कानून का नाम: Online Safety Amendment (Social Media Minimum Age) Act
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प्लेटफॉर्म्स को “उचित कदम” उठाकर 16 वर्ष से कम उम्र के यूज़र्स के मौजूदा अकाउंट हटाने होंगे।
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नए अकाउंट बनाने से रोकना और किसी भी तरह के वर्कअराउंड को बंद करना अनिवार्य होगा।
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गलती से हटाए गए अकाउंट्स को सुधारने की प्रक्रिया भी जरूरी होगी।
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कानून का उद्देश्य
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार, यह कानून बच्चों को, सोशल मीडिया के दबाव, साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए लाया गया है।
साइबर बुलिंग की गंभीरता
एक सरकारी सर्वे में पाया गया कि ऑस्ट्रेलिया के आधे से अधिक युवा सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग का सामना कर चुके हैं, जो इस तरह के कानून की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
निष्कर्ष
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को एक उभरती हुई नीति-प्राथमिकता मानता है। आयु-आधारित सीमाएँ, माता-पिता की सहमति, और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही जैसे कदम भारत में डिजिटल स्पेस को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।