भारत सरकार के Ministry of Electronics and Information Technology ने सूचना प्रौद्योगिकी (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) संशोधन नियम, 2025 को अधिसूचित किया है। यह संशोधन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत मध्यस्थों की ‘ड्यू डिलिजेंस’ जिम्मेदारियों को और मजबूत करता है तथा अवैध कंटेंट हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, अनुपातिकता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
संशोधन का दायरा और उद्देश्य
इन संशोधनों के माध्यम से आईटी नियम, 2021 में परिवर्तन किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, लक्ष्य यह है कि मध्यस्थों द्वारा अवैध जानकारी हटाने की कार्रवाई स्पष्ट नियमों के तहत हो, ताकि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा बनी रहे और राज्य की वैध नियामक शक्तियों का संतुलित उपयोग हो सके। संशोधित नियम अगले माह की पहली तारीख से प्रभावी होंगे।
नियम 3(1)(d) में प्रमुख बदलाव
नियम 3(1)(d) में किए गए संशोधनों के तहत अवैध कंटेंट हटाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान जोड़े गए हैं। अब मध्यस्थों को अवैध जानकारी हटाने की कार्रवाई तभी करनी होगी जब उन्हें वास्तविक जानकारी किसी न्यायालय के आदेश या सक्षम सरकारी प्राधिकरण की अधिसूचना के माध्यम से प्राप्त हो। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि कंटेंट हटाने की प्रक्रिया मनमानी न हो और विधिसम्मत आधार पर ही हो।
वरिष्ठ स्तर की जवाबदेही और स्पष्टता
मंत्रालय ने नियमों की समीक्षा के बाद यह आवश्यकता रेखांकित की कि अवैध कंटेंट हटाने के निर्देश वरिष्ठ स्तर पर जारी हों। इसके अनुसार, अब किसी मध्यस्थ को अवैध जानकारी हटाने की सूचना केवल संयुक्त सचिव या समकक्ष स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा जारी नहीं की जा सकती। इससे निर्णय प्रक्रिया में जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित होगी।
पुलिस अधिकारियों के लिए प्रावधान
पुलिस प्राधिकरणों के मामले में यह स्पष्ट किया गया है कि अवैध कंटेंट हटाने की सूचना केवल उप महानिरीक्षक (DIG) या उससे ऊपर के रैंक के, विशेष रूप से अधिकृत अधिकारी द्वारा ही जारी की जा सकेगी। यह प्रावधान कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जारी निर्देशों में अनुशासन और वैधानिकता सुनिश्चित करता है।
कानूनी आधार का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य
संशोधित नियमों के अनुसार, अवैध कंटेंट हटाने संबंधी किसी भी सूचना में कानूनी आधार और संबंधित वैधानिक प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इससे मध्यस्थों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि किस कानून के तहत कार्रवाई अपेक्षित है और उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
संवैधानिक अधिकारों और राज्य शक्तियों के बीच संतुलन
मंत्रालय के अनुसार, ये संशोधन नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों और राज्य की वैध नियामक शक्तियों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। पारदर्शी और जवाबदेह प्रवर्तन तंत्र के माध्यम से मनमानी या अत्यधिक प्रतिबंधों की संभावना को कम किया गया है।
आईटी नियम 2021 की पृष्ठभूमि
आईटी नियम, 2021 को मूल रूप से 2021 में अधिसूचित किया गया था और बाद में 2022 तथा 2023 में संशोधित किया गया। इन नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित सभी मध्यस्थों पर ड्यू डिलिजेंस दायित्व लागू करना है, ताकि ऑनलाइन सुरक्षा, संरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
डीपफेक से संबंधित ड्राफ्ट संशोधनों पर परामर्श
इसी बीच, मंत्रालय ने सिंथेटिक रूप से जनित जानकारी (Deepfakes) से संबंधित ड्राफ्ट संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं। यह प्रस्तावित संशोधन सोशल मीडिया मध्यस्थों और उन प्लेटफॉर्म्स के लिए ड्यू डिलिजेंस दायित्वों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो सिंथेटिक कंटेंट के निर्माण या संशोधन को सक्षम बनाते हैं।
लेबलिंग और मेटाडेटा एम्बेडिंग का प्रस्ताव
प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत सिंथेटिक कंटेंट के लिए लेबलिंग और मेटाडेटा एम्बेडिंग की आवश्यकता पेश की गई है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट रूप से पहचानने में सक्षम बनाना है कि कोई कंटेंट वास्तविक है या कृत्रिम रूप से जनित। इससे गलत सूचना और भ्रामक कंटेंट के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।